पयोमुचां मेचकिमानमुच्चै-
रुच्चाटयामास ऋतुः शरद्या ।
अपारि वामोरु तयापि किंचि-
न्न प्रोञ्छितुं लाञ्छनकालिमाष्य ॥
पयोमुचां मेचकिमानमुच्चै-
रुच्चाटयामास ऋतुः शरद्या ।
अपारि वामोरु तयापि किंचि-
न्न प्रोञ्छितुं लाञ्छनकालिमाष्य ॥
रुच्चाटयामास ऋतुः शरद्या ।
अपारि वामोरु तयापि किंचि-
न्न प्रोञ्छितुं लाञ्छनकालिमाष्य ॥
अन्वयः
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वामोरु, शरद्या ऋतुः पयोमुचाम् मेचकिमानम् उच्चैः उच्चाटयामास । तया अपि अस्य लाञ्छन-कालिमा किंचित् प्रोञ्छितुम् न अपारि ।
Summary
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O you with beautiful thighs, the autumn season completely dispelled the blackness of the clouds. Yet, even it was not able to wipe away even a little of the blackness of the spot on this moon.
पदच्छेदः
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| पयोमुचाम् | पयोमुच् (६.३) | of the clouds |
| मेचकिमानम् | मेचकिमन् (२.१) | the blackness |
| उच्चैः | उच्चैस् | completely |
| उच्चाटयामास | उच्चाटयामास (उद्√चट् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | dispelled |
| ऋतुः | ऋतु (१.१) | the season |
| शरद्या | शरद् (३.१) | by autumn |
| अपारि | अपारि (√पृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was able |
| वामोरु | वामोरू (८.१) | O you with beautiful thighs |
| तया | तद् (३.१) | by it |
| अपि | अपि | even |
| किंचित् | किंचित् | a little |
| न | न | not |
| प्रोञ्छितुम् | प्रोञ्छितुम् (प्र√उञ्छ्+तुमुन्) | to wipe away |
| लाञ्छन | लाञ्छन | of the spot |
| कालिमा | कालिमन् (१.१) | the blackness |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this (moon) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | यो | मु | चां | मे | च | कि | मा | न | मु | च्चै |
| रु | च्चा | ट | या | मा | स | ऋ | तुः | श | र | द्या |
| अ | पा | रि | वा | मो | रु | त | या | पि | किं | चि |
| न्न | प्रो | ञ्छि | तुं | ला | ञ्छ | न | का | लि | मा | ष्य |
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