आभिर्मृगेन्द्रोदरि कौमुदीभिः
क्षीरस्य धाराभिरिव क्षणेन ।
अक्षालि नीली रुचिरम्बरस्था
तमोमयीयं रजनीरजक्या ॥
आभिर्मृगेन्द्रोदरि कौमुदीभिः
क्षीरस्य धाराभिरिव क्षणेन ।
अक्षालि नीली रुचिरम्बरस्था
तमोमयीयं रजनीरजक्या ॥
क्षीरस्य धाराभिरिव क्षणेन ।
अक्षालि नीली रुचिरम्बरस्था
तमोमयीयं रजनीरजक्या ॥
अन्वयः
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मृगेन्द्र-उदरि, इयम् अम्बर-स्था तमः-मयी नीली रुचिः रजनी-रजक्या आभिः कौमुदीभिः क्षीरस्य धाराभिः इव क्षणेन अक्षालि ।
Summary
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O you with a waist like a lion's, this indigo hue of darkness situated in the sky has been washed away in a moment by the washerwoman of the night (the moon) with these moonbeams, as if with streams of milk.
पदच्छेदः
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| आभिः | इदम् (३.३) | by these |
| मृगेन्द्र | मृगेन्द्र | lion's |
| उदरि | उदरी (८.१) | O one with a waist like a |
| कौमुदीभिः | कौमुदी (३.३) | by the moonbeams |
| क्षीरस्य | क्षीर (६.१) | of milk |
| धाराभिः | धारा (३.३) | by the streams |
| इव | इव | like |
| क्षणेन | क्षण (३.१) | in a moment |
| अक्षालि | अक्षालि (√क्षल् +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was washed |
| नीली | नीली | indigo |
| रुचिः | रुचि (१.१) | hue |
| अम्बर | अम्बर | in the sky |
| स्था | स्था (√स्था) | situated |
| तमः | तमस् | of darkness |
| मयी | मयी (√मयट्) | made |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| रजनी | रजनी | of the night |
| रजक्या | रजकी (३.१) | by the washerwoman |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | भि | र्मृ | गे | न्द्रो | द | रि | कौ | मु | दी | भिः |
| क्षी | र | स्य | धा | रा | भि | रि | व | क्ष | णे | न |
| अ | क्षा | लि | नी | ली | रु | चि | र | म्ब | र | स्था |
| त | मो | म | यी | यं | र | ज | नी | र | ज | क्या |
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