अस्मिन्न विस्मापयतेऽयमस्मां-
श्चक्षुर्बभूवैष यदादिपुंसः ।
तदत्रिनेत्रादुदितस्य तन्वि
कुलानुरूपं किल रूपमस्य ॥
अस्मिन्न विस्मापयतेऽयमस्मां-
श्चक्षुर्बभूवैष यदादिपुंसः ।
तदत्रिनेत्रादुदितस्य तन्वि
कुलानुरूपं किल रूपमस्य ॥
श्चक्षुर्बभूवैष यदादिपुंसः ।
तदत्रिनेत्रादुदितस्य तन्वि
कुलानुरूपं किल रूपमस्य ॥
अन्वयः
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तन्वि, अयम् अस्मान् न विस्मापयते । यत् एषः आदिपुंसः चक्षुः बभूव, तत् (तस्मात्) अत्रि-नेत्रात् उदितस्य अस्य रूपम् कुल-अनुरूपम् किल ।
Summary
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O slender one, this moon does not surprise us. Because he was born from the eye of sage Atri, who himself originated from the Primeval Being, this beauty of his is indeed befitting his lineage.
पदच्छेदः
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| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in this matter |
| न | न | not |
| विस्मापयते | विस्मापयते (वि√स्मि +णिच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | causes to wonder |
| अयम् | इदम् (१.१) | this (moon) |
| अस्मान् | अस्मद् (२.३) | us |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | the eye |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| एषः | एतद् (१.१) | this one |
| यत् | यद् | because |
| आदिपुंसः | आदिपुंस् (६.१) | of the Primeval Being |
| तत् | तद् | therefore |
| अत्रि | अत्रि | Atri's |
| नेत्रात् | नेत्र (५.१) | from the eye |
| उदितस्य | उदित (उद्√इ+क्त, ६.१) | of the one who has risen |
| तन्वि | तन्वी (८.१) | O slender one |
| कुल | कुल | lineage |
| अनुरूपम् | अनुरूप (१.१) | befitting |
| किल | किल | indeed |
| रूपम् | रूप (१.१) | the beauty |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this one |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्मि | न्न | वि | स्मा | प | य | ते | ऽय | म | स्मां |
| श्च | क्षु | र्ब | भू | वै | ष | य | दा | दि | पुं | सः |
| त | द | त्रि | ने | त्रा | दु | दि | त | स्य | त | न्वि |
| कु | ला | नु | रू | पं | कि | ल | रू | प | म | स्य |
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