स्ववर्णना न स्वयमर्हतीति
नियुज्य मां त्वन्मुखमिन्दुरूपम् ।
स्थानेऽत्युदास्ते शशिनः प्रशस्तौ
धरातुरासाहमिति स्म साह ॥
स्ववर्णना न स्वयमर्हतीति
नियुज्य मां त्वन्मुखमिन्दुरूपम् ।
स्थानेऽत्युदास्ते शशिनः प्रशस्तौ
धरातुरासाहमिति स्म साह ॥
नियुज्य मां त्वन्मुखमिन्दुरूपम् ।
स्थानेऽत्युदास्ते शशिनः प्रशस्तौ
धरातुरासाहमिति स्म साह ॥
अन्वयः
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'स्व-वर्णना स्वयम् न अर्हति' इति विचार्य इन्दु-रूपम् त्वत्-मुखम् माम् नियुज्य शशिनः प्रशस्तौ अति-उदास्ते इति स्थाने । धरा-तुरासाह, इति सा आह स्म ।
Summary
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She said: "O Indra on earth (Nala)! It is fitting that your moon-like face, thinking 'self-praise is not proper,' has appointed me and remains indifferent to the praise of the moon."
पदच्छेदः
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| स्ववर्णना | स्व–वर्णना (१.१) | self-praise |
| न | न | not |
| स्वयम् | स्वयम् | oneself |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is proper |
| इति | इति | thus |
| नियुज्य | नियुज्य (नि√युज्+ल्यप्) | having appointed |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| त्वन्मुखम् | युष्मद्–मुख (१.१) | your face |
| इन्दुरूपम् | इन्दु–रूप (१.१) | moon-like |
| स्थाने | स्थान (७.१) | it is fitting |
| अत्युदास्ते | अत्युदास्ते (अति+उद्√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | remains indifferent |
| शशिनः | शशिन् (६.१) | of the moon |
| प्रशस्तौ | प्रशस्ति (७.१) | in the praise |
| धरातुरासाहम् | धरा–तुरासाह् (८.१) | O Indra on earth |
| इति | इति | thus |
| स्म | स्म | (past tense marker) |
| सा | तद् (१.१) | she |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | व | र्ण | ना | न | स्व | य | म | र्ह | ती | ति |
| नि | यु | ज्य | मां | त्व | न्मु | ख | मि | न्दु | रू | पम् |
| स्था | ने | ऽत्यु | दा | स्ते | श | शि | नः | प्र | श | स्तौ |
| ध | रा | तु | रा | सा | ह | मि | ति | स्म | सा | ह |
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