इतो मुखाद्वागियमाविरासी-
त्पीयूषधारामधुरेति जल्पन् ।
अचुम्बदस्याः स मुखेन्दुबिम्बं
संवावदूकश्रियमम्बुजानाम् ॥
इतो मुखाद्वागियमाविरासी-
त्पीयूषधारामधुरेति जल्पन् ।
अचुम्बदस्याः स मुखेन्दुबिम्बं
संवावदूकश्रियमम्बुजानाम् ॥
त्पीयूषधारामधुरेति जल्पन् ।
अचुम्बदस्याः स मुखेन्दुबिम्बं
संवावदूकश्रियमम्बुजानाम् ॥
अन्वयः
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'इयम् पीयूष-धारा-मधुरा वाक् इतः मुखात् आविरासीत्' इति जल्पन् सः, अम्बुजानाम् संवावदूक-श्रियम् अस्याः मुख-इन्दु-बिम्बम् अचुम्बत् ।
Summary
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Saying, "This speech, sweet as a stream of nectar, has emerged from this mouth," he (Nala) kissed her moon-like face-orb, which possessed the eloquent beauty of lotuses.
पदच्छेदः
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| इतः | इतः | from this |
| मुखात् | मुख (५.१) | from mouth |
| वाक् | वाच् (१.१) | speech |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| आविरासीत् | आविरासीत् (आविर्√अस् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | emerged |
| पीयूषधारामधुरा | पीयूष–धारा–मधुर (१.१) | sweet as a stream of nectar |
| इति | इति | thus |
| जल्पन् | जल्पत् (√जल्प्+शतृ, १.१) | saying |
| अचुम्बत् | अचुम्बत् (√चुम्ब् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | kissed |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मुखेन्दुबिम्बम् | मुख–इन्दु–बिम्ब (२.१) | moon-like face-orb |
| संवावदूकश्रियमम्बुजानाम् | संवावदूक–श्री (२.१)–अम्बुज (६.३) | the eloquent beauty of lotuses |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | तो | मु | खा | द्वा | गि | य | मा | वि | रा | सी |
| त्पी | यू | ष | धा | रा | म | धु | रे | ति | ज | ल्पन् |
| अ | चु | म्ब | द | स्याः | स | मु | खे | न्दु | बि | म्बं |
| सं | वा | व | दू | क | श्रि | य | म | म्बु | जा | नाम् |
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