वाणीभिराभिः परिपत्त्रिमाभि-
र्नरेन्द्रमानन्दजडं चकार ।
मुहूर्तमाश्चर्यरसेन भैमी
हैमीव वृष्टिः स्तिमितं च तं सा ॥
वाणीभिराभिः परिपत्त्रिमाभि-
र्नरेन्द्रमानन्दजडं चकार ।
मुहूर्तमाश्चर्यरसेन भैमी
हैमीव वृष्टिः स्तिमितं च तं सा ॥
र्नरेन्द्रमानन्दजडं चकार ।
मुहूर्तमाश्चर्यरसेन भैमी
हैमीव वृष्टिः स्तिमितं च तं सा ॥
अन्वयः
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सा भैमी आभिः परिपत्त्रिमाभिः वाणीभिः नरेन्द्रम् आनन्द-जडम् चकार, च हैमी वृष्टिः इव मुहूर्तम् आश्चर्य-रसेन तम् स्तिमितम् चकार ।
Summary
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With these sharp and eloquent words, that Damayanti made the king numb with joy. And for a moment, with the sentiment of wonder, she made him motionless, like a golden rain shower.
पदच्छेदः
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| वाणीभिः | वाणी (३.३) | with words |
| आभिः | इदम् (३.३) | with these |
| परिपत्त्रिमाभिः | परिपत्त्रिम (३.३) | eloquent/sharp |
| नरेन्द्रम् | नरेन्द्र (२.१) | the king |
| आनन्दजडम् | आनन्द–जड (२.१) | numb with joy |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she made |
| मुहूर्तम् | मुहूर्तम् | for a moment |
| आश्चर्यरसेन | आश्चर्य–रस (३.१) | with the sentiment of wonder |
| भैमी | भैमी (१.१) | Damayanti |
| हैमी | हैमी (१.१) | golden |
| इव | इव | like |
| वृष्टिः | वृष्टि (१.१) | a shower |
| स्तिमितम् | स्तिमित (२.१) | motionless |
| च | च | and |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| सा | तद् (१.१) | she |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | णी | भि | रा | भिः | प | रि | प | त्त्रि | मा | भि |
| र्न | रे | न्द्र | मा | न | न्द | ज | डं | च | का | र |
| मु | हू | र्त | मा | श्च | र्य | र | से | न | भै | मी |
| है | मी | व | वृ | ष्टिः | स्ति | मि | तं | च | तं | सा |
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