मां त्रिविक्रम पुनीहि पदे ते
किं लगन्नजनि राहुरुपानत् ।
किं प्रदक्षिणनकृद्भ्रमिपाशं
जाम्बवानदित ते बलिबन्धे ॥
मां त्रिविक्रम पुनीहि पदे ते
किं लगन्नजनि राहुरुपानत् ।
किं प्रदक्षिणनकृद्भ्रमिपाशं
जाम्बवानदित ते बलिबन्धे ॥
किं लगन्नजनि राहुरुपानत् ।
किं प्रदक्षिणनकृद्भ्रमिपाशं
जाम्बवानदित ते बलिबन्धे ॥
अन्वयः
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हे त्रिविक्रम, माम् पुनीहि। ते पदे लगन् राहुः किम् उपानत् अजनि? ते बलि-बन्धे प्रदक्षिण-नकृत् जाम्बवान् किम् भ्रमि-पाशम् अदित?
Summary
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O Trivikrama, purify me! Did Rahu, by merely touching your foot, become a sandal? (No, he was liberated). During the binding of Bali, did Jambavan, who circumambulated you, give you a noose of wandering? (No, he was blessed).
पदच्छेदः
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| मां | अस्मद् (२.१) | me |
| त्रिविक्रम | त्रिविक्रम (८.१) | O Trivikrama |
| पुनीहि | पुनीहि (√पू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | purify |
| पदे | पद (७.१) | on the foot |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| किं | किम् | what? |
| लगन् | लगत् (√लग्+शतृ, १.१) | touching |
| अजनि | अजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was born/became |
| राहुः | राहु (१.१) | Rahu |
| उपानत् | उपानह् (१.१) | a sandal |
| किं | किम् | what? |
| प्रदक्षिणनकृत् | प्रदक्षिण–न–कृत् (१.१) | one who did not circumambulate |
| भ्रमिपाशं | भ्रमि–पाश (२.१) | the noose of wandering |
| जाम्बवान् | जाम्बवत् (१.१) | Jambavan |
| अदित | अदित (√दा भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was given |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| बलिबन्धे | बलि–बन्ध (७.१) | at the time of binding Bali |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मां | त्रि | वि | क्र | म | पु | नी | हि | प | दे | ते |
| किं | ल | ग | न्न | ज | नि | रा | हु | रु | पा | नत् |
| किं | प्र | द | क्षि | ण | न | कृ | द्भ्र | मि | पा | शं |
| जा | म्ब | वा | न | दि | त | ते | ब | लि | ब | न्धे |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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