भानुसूनुमनुगृह्य जय त्वं
राममूर्तिहतवृत्रहपुत्रः ।
इन्द्रनन्दनसपक्षमपि त्वां
नौमि कृष्ण निहतार्कतनूजम् ॥
भानुसूनुमनुगृह्य जय त्वं
राममूर्तिहतवृत्रहपुत्रः ।
इन्द्रनन्दनसपक्षमपि त्वां
नौमि कृष्ण निहतार्कतनूजम् ॥
राममूर्तिहतवृत्रहपुत्रः ।
इन्द्रनन्दनसपक्षमपि त्वां
नौमि कृष्ण निहतार्कतनूजम् ॥
अन्वयः
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(हे देव) त्वम् राममूर्तिः (सन्) वृत्रहपुत्रः हतः (येन सः) (सन्) भानुसूनुम् अनुगृह्य जय। (हे) कृष्ण, इन्द्रनन्दनसपक्षम् अपि निहत-अर्क-तनूजम् त्वाम् नौमि।
Summary
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As Rama, you killed Vali (Indra's son) and favored Sugriva (the sun's son); be victorious! O Krishna, I also praise you who, while siding with Arjuna (Indra's son), killed Karna (the sun's son).
पदच्छेदः
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| भानुसूनुम् | भानु–सूनु (२.१) | the son of the sun (Sugriva) |
| अनुगृह्य | अनुगृह्य (अनु√ग्रह्+ल्यप्) | having favored |
| जय | जय (√जि कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be victorious |
| त्वं | युष्मद् (१.१) | you |
| राममूर्तिहतवृत्रहपुत्रः | राम–मूर्ति–हत (√हन्+क्त)–वृत्रहन्–पुत्र (१.१) | as Rama, the slayer of Indra's son (Vali) |
| इन्द्रनन्दनसपक्षम् | इन्द्र–नन्दन–सपक्ष (२.१) | who is on the side of Indra's son (Arjuna) |
| अपि | अपि | also |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| नौमि | नौमि (√नु कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I praise |
| कृष्ण | कृष्ण (८.१) | O Krishna |
| निहतार्कतनूजम् | निहत (नि√हन्+क्त)–अर्क–तनूज (२.१) | who killed the son of the sun (Karna) |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भा | नु | सू | नु | म | नु | गृ | ह्य | ज | य | त्वं |
| रा | म | मू | र्ति | ह | त | वृ | त्र | ह | पु | त्रः |
| इ | न्द्र | न | न्द | न | स | प | क्ष | म | पि | त्वां |
| नौ | मि | कृ | ष्ण | नि | ह | ता | र्क | त | नू | जम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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