दानवारिरसिकायविभूते-
र्वश्मि तेऽस्मि सुतरां प्रतिपत्तिम् ।
इत्युदग्रपुलकं बलिनोक्तं
त्वां नमामि कृतवामनमायम् ॥
दानवारिरसिकायविभूते-
र्वश्मि तेऽस्मि सुतरां प्रतिपत्तिम् ।
इत्युदग्रपुलकं बलिनोक्तं
त्वां नमामि कृतवामनमायम् ॥
र्वश्मि तेऽस्मि सुतरां प्रतिपत्तिम् ।
इत्युदग्रपुलकं बलिनोक्तं
त्वां नमामि कृतवामनमायम् ॥
अन्वयः
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(हे) दानवारि! रसिकाय ते विभूतेः अस्मि सुतराम् प्रतिपत्तिम् वश्मि, इति उदग्रपुलकम् बलिना उक्तम् कृतवामनमायम् त्वाम् नमामि ।
Summary
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"I bow to You, who practiced the illusion of being a dwarf, and who were told by Bali, with his hair standing on end, 'I wish to grant this high honor to you, a connoisseur of the glory of Vishnu.'"
पदच्छेदः
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| दानवारिरसिकाय | दानव–अरि–रसिक (४.१) | to the connoisseur of the enemy of demons (Vishnu) |
| विभूतेः | विभूति (६.१) | of glory |
| वश्मि | वश्मि (√वश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I wish |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
| अस्मि | इदम् (२.१) | this |
| सुतराम् | सुतराम् | very high |
| प्रतिपत्तिम् | प्रतिपत्ति (२.१) | honor |
| इति | इति | thus |
| उदग्रपुलकम् | उदग्रपुलकम् | with hair standing on end |
| बलिना | बलिन् (३.१) | by Bali |
| उक्तम् | उक्त (√वच्+क्त, २.१) | told |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | to You |
| नमामि | नमामि (√नम् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I bow |
| कृतवामनमायम् | कृत (√कृ+क्त)–वामन–माया (२.१) | who practiced the illusion of a dwarf |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दा | न | वा | रि | र | सि | का | य | वि | भू | ते |
| र्व | श्मि | ते | ऽस्मि | सु | त | रां | प्र | ति | प | त्तिम् |
| इ | त्यु | द | ग्र | पु | ल | कं | ब | लि | नो | क्तं |
| त्वां | न | मा | मि | कृ | त | वा | म | न | मा | यम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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