स्वप्रकाश जड एष जनस्ते
वर्णनं यदभिलष्यति कर्तुम् ।
नन्वहर्पतिमहः प्रति स स्या-
न्न प्रकाशनरसस्तमसः किम् ॥
स्वप्रकाश जड एष जनस्ते
वर्णनं यदभिलष्यति कर्तुम् ।
नन्वहर्पतिमहः प्रति स स्या-
न्न प्रकाशनरसस्तमसः किम् ॥
वर्णनं यदभिलष्यति कर्तुम् ।
नन्वहर्पतिमहः प्रति स स्या-
न्न प्रकाशनरसस्तमसः किम् ॥
अन्वयः
AI
स्वप्रकाश! ते एषः जडः जनः यत् वर्णनम् कर्तुम् अभिलष्यति, (तत् आश्चर्यम्) । ननु तमसः अहर्पतिमहः प्रति प्रकाशनरसः सः न स्यात् किम्?
Summary
AI
"O Self-luminous One! That this dull person desires to describe You is astonishing. Indeed, would darkness have a passion for illuminating the light of the sun? It would not."
पदच्छेदः
AI
| स्वप्रकाश | स्वप्रकाश (८.१) | O Self-luminous One |
| जडः | जड (१.१) | dull |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| जनः | जन (१.१) | person |
| ते | युष्मद् (६.१) | Your |
| वर्णनम् | वर्णन (२.१) | description |
| यत् | यद् | that |
| अभिलष्यति | अभिलष्यति (अभि√लष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to do |
| ननु | ननु | indeed |
| अहर्पतिमहः | अहर्पति–महस् (२.१) | the light of the sun |
| प्रति | प्रति | towards |
| सः | तद् (१.१) | that |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| न | न | not |
| प्रकाशनरसः | प्रकाशन–रस (१.१) | passion for illuminating |
| तमसः | तमस् (६.१) | of darkness |
| किम् | किम् | ? |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | प्र | का | श | ज | ड | ए | ष | ज | न | स्ते |
| व | र्ण | नं | य | द | भि | ल | ष्य | ति | क | र्तुम् |
| न | न्व | ह | र्प | ति | म | हः | प्र | ति | स | स्या |
| न्न | प्र | का | श | न | र | स | स्त | म | सः | किम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.