दूरतः स्तुतिरवाग्विषयस्ते
रूपमस्मदभिधा तव निन्दा ।
तत्क्षमस्व यदहं प्रलपामी-
त्युक्तिपूर्वमयमेतदवोचत् ॥
दूरतः स्तुतिरवाग्विषयस्ते
रूपमस्मदभिधा तव निन्दा ।
तत्क्षमस्व यदहं प्रलपामी-
त्युक्तिपूर्वमयमेतदवोचत् ॥
रूपमस्मदभिधा तव निन्दा ।
तत्क्षमस्व यदहं प्रलपामी-
त्युक्तिपूर्वमयमेतदवोचत् ॥
अन्वयः
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ते स्तुतिः दूरतः, रूपम् अवाक् विषयः, तव अस्मत् अभिधा निन्दा । तत् क्षमस्व यत् अहम् प्रलपामि, इति उक्तिपूर्वम् अयम् एतत् अवोचत् ।
Summary
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"Praise of You is far off, Your form is beyond the scope of speech, and my words about You are but censure. Therefore, forgive me for what I prattle." Saying this first, he (Nala) spoke the following.
पदच्छेदः
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| दूरतः | दूरतः | is far from |
| स्तुतिः | स्तुति (१.१) | praise |
| अवाग्विषयः | अवाच्–विषय (१.१) | is beyond the scope of speech |
| ते | युष्मद् (६.१) | Your |
| रूपम् | रूप (१.१) | form |
| अस्मदभिधा | अस्मद्–अभिधा (१.१) | my words |
| तव | युष्मद् (६.१) | about You |
| निन्दा | निन्दा (१.१) | are censure |
| तत् | तद् | therefore |
| क्षमस्व | क्षमस्व (√क्षम् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | forgive |
| यत् | यद् | that |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| प्रलपामि | प्रलपामि (प्र√लप् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | prattle |
| इति | इति | thus |
| उक्तिपूर्वम् | उक्तिपूर्वम् | having said first |
| अयम् | इदम् (१.१) | he |
| एतत् | एतद् (२.१) | this |
| अवोचत् | अवोचत् (√वच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दू | र | तः | स्तु | ति | र | वा | ग्वि | ष | य | स्ते |
| रू | प | म | स्म | द | भि | धा | त | व | नि | न्दा |
| त | त्क्ष | म | स्व | य | द | हं | प्र | ल | पा | मी |
| त्यु | क्ति | पू | र्व | म | य | मे | त | द | वो | चत् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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