त्र्यम्बकस्य पदयोः कुसुमानि
न्यस्य सैष निजशस्त्रनिभानि ।
दण्डवद्भुवि लुठन्किमु काम-
स्तं शरण्यमुपगम्य ननाम ॥
त्र्यम्बकस्य पदयोः कुसुमानि
न्यस्य सैष निजशस्त्रनिभानि ।
दण्डवद्भुवि लुठन्किमु काम-
स्तं शरण्यमुपगम्य ननाम ॥
न्यस्य सैष निजशस्त्रनिभानि ।
दण्डवद्भुवि लुठन्किमु काम-
स्तं शरण्यमुपगम्य ननाम ॥
अन्वयः
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सः एषः (नलः) त्र्यम्बकस्य पदयोः निज-शस्त्र-निभानि कुसुमानि न्यस्य दण्डवत् भुवि लुठन् (ननाम) । किमु कामः तं शरण्यम् उपगम्य ननाम?
Summary
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This Nala placed flowers resembling his own weapons at Tryambaka's feet and prostrated himself on the ground. The poet wonders: or was it Kama himself, approaching that great refuge and bowing down?
पदच्छेदः
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| त्र्यम्बकस्य | त्र्यम्बक (६.१) | of Tryambaka |
| पदयोः | पद (७.२) | at the feet |
| कुसुमानि | कुसुम (२.३) | flowers |
| न्यस्य | न्यस्य (नि√अस्+ल्यप्) | having placed |
| सः | तद् (१.१) | he |
| एषः | एतद् (१.१) | this (Nala) |
| निजशस्त्रनिभानि | निज–शस्त्र–निभ (२.३) | resembling his own weapons |
| दण्डवत् | दण्डवत् | like a staff |
| भुवि | भू (७.१) | on the ground |
| लुठन् | लुठत् (√लुठ्+शतृ, १.१) | rolling |
| किमु | किमु | Is it that...? |
| कामः | काम (१.१) | Kama |
| तं | तद् (२.१) | him |
| शरण्यम् | शरण्य (२.१) | the one who gives refuge |
| उपगम्य | उपगम्य (उप√गम्+ल्यप्) | having approached |
| ननाम | ननाम (√नम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bowed |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्र्य | म्ब | क | स्य | प | द | योः | कु | सु | मा | नि |
| न्य | स्य | सै | ष | नि | ज | श | स्त्र | नि | भा | नि |
| द | ण्ड | व | द्भु | वि | लु | ठ | न्कि | मु | का | म |
| स्तं | श | र | ण्य | मु | प | ग | म्य | न | ना | म |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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