सम्यगर्चति नलेऽर्कमतूर्णं
भक्तिगन्धिरमुनाकलि कर्णः ।
श्रद्दधानहृदयप्रति चातः
साम्बमम्बरमणिर्निरचैषीत् ॥
सम्यगर्चति नलेऽर्कमतूर्णं
भक्तिगन्धिरमुनाकलि कर्णः ।
श्रद्दधानहृदयप्रति चातः
साम्बमम्बरमणिर्निरचैषीत् ॥
भक्तिगन्धिरमुनाकलि कर्णः ।
श्रद्दधानहृदयप्रति चातः
साम्बमम्बरमणिर्निरचैषीत् ॥
अन्वयः
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नले अर्कम् अतूर्णं सम्यक् अर्चति (सति), अमुना भक्तिगन्धिः कर्णः अकलि । च अतः श्रद्दधानहृदयप्रति अम्बरमणिः साम्बं निरचैषीत् ।
Summary
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While Nala was properly and unhurriedly worshipping the sun, his ear, fragrant with devotion, was perceived by him. Therefore, the jewel of the sky (the Sun), in response to his faithful heart, created a vision of Shiva accompanied by Amba (Samba).
पदच्छेदः
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| सम्यक् | सम्यक् | properly |
| अर्चति | अर्चत् (√अर्च+शतृ, ७.१) | while worshipping |
| नले | नल (७.१) | Nala |
| अर्कम् | अर्क (२.१) | the Sun |
| अतूर्णं | अतूर्णम् | unhurriedly |
| भक्तिगन्धिः | भक्ति–गन्धि (१.१) | fragrant with devotion |
| अमुना | अदस् (३.१) | by him |
| अकलि | अकलि (√कल् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was perceived |
| कर्णः | कर्ण (१.१) | the ear |
| श्रद्दधानहृदयप्रति | दधान (√श्रत्+शानच्)–हृदय–प्रति | in response to his faithful heart |
| च | च | and |
| अतः | अतः | therefore |
| साम्बम् | साम्ब (२.१) | Samba (Shiva with Amba) |
| अम्बरमणिः | अम्बर–मणि (१.१) | the jewel of the sky (the Sun) |
| निरचैषीत् | निरचैषीत् (निर्√चि कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | created |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | म्य | ग | र्च | ति | न | ले | ऽर्क | म | तू | र्णं |
| भ | क्ति | ग | न्धि | र | मु | ना | क | लि | क | र्णः |
| श्र | द्द | धा | न | हृ | द | य | प्र | ति | चा | तः |
| सा | म्ब | म | म्ब | र | म | णि | र्नि | र | चै | षीत् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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