तस्य चीनसिचयैरपि बद्धा
पद्धतिः पदयुगात्कठिनेति ।
तां प्यधत्त शिरसां खलु माल्यै-
राजराजिरभितः प्रणमन्ती ॥
तस्य चीनसिचयैरपि बद्धा
पद्धतिः पदयुगात्कठिनेति ।
तां प्यधत्त शिरसां खलु माल्यै-
राजराजिरभितः प्रणमन्ती ॥
पद्धतिः पदयुगात्कठिनेति ।
तां प्यधत्त शिरसां खलु माल्यै-
राजराजिरभितः प्रणमन्ती ॥
अन्वयः
AI
तस्य पदयुगात् चीनसिचयैः अपि बद्धा पद्धतिः कठिना इति (मत्वा) अभितः प्रणमन्ती राजराजिः खलु ताम् शिरसाम् माल्यैः पि अधत्त ।
Summary
AI
Thinking that the path, even though covered with Chinese silks, was too hard for his pair of feet, the assembly of kings, bowing all around, indeed covered it with the garlands from their heads.
पदच्छेदः
AI
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| चीनसिचयैः | चीनसिचय (३.३) | with Chinese silks |
| अपि | अपि | even |
| बद्धा | बद्धा (√बन्ध्+क्त+टाप्, १.१) | made |
| पद्धतिः | पद्धति (१.१) | path |
| पदयुगात् | पदयुग (५.१) | than his pair of feet |
| कठिना | कठिना (१.१) | hard |
| इति | इति | thus thinking |
| ताम् | तद् (२.१) | it |
| पि अधत्त | अधत्त (पि√धा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | covered |
| शिरसाम् | शिरस् (६.३) | of their heads |
| खलु | खलु | indeed |
| माल्यैः | माल्य (३.३) | with garlands |
| राजराजिः | राजराजि (१.१) | the assembly of kings |
| अभितः | अभितस् | all around |
| प्रणमन्ती | प्रणमन्ती (प्र√नम्+शतृ+ङीप्, १.१) | bowing |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | ची | न | सि | च | यै | र | पि | ब | द्धा |
| प | द्ध | तिः | प | द | यु | गा | त्क | ठि | ने | ति |
| तां | प्य | ध | त्त | शि | र | सां | ख | लु | मा | ल्यै |
| रा | ज | रा | जि | र | भि | तः | प्र | ण | म | न्ती |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.