शोकश्चेत्कोकयोस्त्वां सुदति तुदति तद्व्याहराज्ञाकरस्ते
गत्वा कुल्यामनस्तं व्रजितुमनुनये भानुमेतज्जलस्थम् ।
बद्धे मय्यञ्जलावप्यनुनयविमुखः स्यान्ममैकग्रहोऽयं
दत्त्वैवाभ्यां तदम्भोञ्जलिमिह भवतीं पश्य मामेष्यमाणम् ॥
शोकश्चेत्कोकयोस्त्वां सुदति तुदति तद्व्याहराज्ञाकरस्ते
गत्वा कुल्यामनस्तं व्रजितुमनुनये भानुमेतज्जलस्थम् ।
बद्धे मय्यञ्जलावप्यनुनयविमुखः स्यान्ममैकग्रहोऽयं
दत्त्वैवाभ्यां तदम्भोञ्जलिमिह भवतीं पश्य मामेष्यमाणम् ॥
गत्वा कुल्यामनस्तं व्रजितुमनुनये भानुमेतज्जलस्थम् ।
बद्धे मय्यञ्जलावप्यनुनयविमुखः स्यान्ममैकग्रहोऽयं
दत्त्वैवाभ्यां तदम्भोञ्जलिमिह भवतीं पश्य मामेष्यमाणम् ॥
अन्वयः
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सुदति, चेत् कोकयोः शोकः त्वाम् तुदति, तत् व्याहर । ते आज्ञाकरः (अहम्) कुल्याम् गत्वा एतत् जलस्थम् भानुम् अनस्तम् व्रजितुम् अनुनये । मयि अञ्जलौ बद्धे अपि (सः) अनुनयविमुखः स्यात् (चेत्), अयम् मम एकग्रहः (अस्ति) । तत् अभ्याम् अम्भः अञ्जलिम् दत्त्वा एव इह भवतीम् पश्य माम् एष्यमाणम् ।
Summary
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O beautiful-toothed one, if the sorrow of the chakravaka birds pains you, then speak. Your obedient servant, I will go to the river and persuade the sun reflected in this water not to set. If he remains averse to my plea even with my folded hands, this is my firm resolve: after giving a handful of that water to these two birds, watch me, as I will be coming to you here.
पदच्छेदः
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| शोकः | शोक (१.१) | The sorrow |
| चेत् | चेत् | if |
| कोकयोः | कोक (६.२) | of the two chakravaka birds |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| सुदति | सुदती (८.१) | O beautiful-toothed one |
| तुदति | तुदति (√तुद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pains |
| तत् | तत् | then |
| व्याहर | व्याहर (वि+आ√हृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | speak |
| आज्ञाकरः | आज्ञाकर (१.१) | Your obedient servant |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| गत्वा | गत्वा (√गम्+क्त्वा) | having gone |
| कुल्याम् | कुल्या (२.१) | to the river |
| अनस्तम् | अनस्तम् (२.१) | not to set |
| व्रजितुम् | व्रजितुम् (√व्रज्+तुमुन्) | to go |
| अनुनये | अनुनये (अनु√नी कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I will persuade |
| भानुम् | भानु (२.१) | the sun |
| एतत् | एतद् (२.१) | this |
| जलस्थम् | जलस्थ (२.१) | situated in the water |
| बद्धे | बद्ध (√बन्ध्+क्त, ७.१) | being folded |
| मयि | अस्मद् (७.१) | by me |
| अञ्जलौ | अञ्जलि (७.१) | in the hands |
| अपि | अपि | even |
| अनुनयविमुखः | अनुनय–विमुख (१.१) | averse to the plea |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | if he should be |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| एकग्रहः | एकग्रह (१.१) | firm resolve |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| दत्त्वा | दत्त्वा (√दा+क्त्वा) | having given |
| एव | एव | just |
| अभ्याम् | इदम् (४.२) | to these two |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| अम्भः | अम्भस् (२.१) | water |
| अञ्जलिम् | अञ्जलि (२.१) | a handful of |
| इह | इह | here |
| भवतीम् | भवत् (२.१) | you |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | watch |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| एष्यमाणम् | एष्यमाण (√इ+स्य+शानच्, २.१) | who will be coming |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शो | क | श्चे | त्को | क | यो | स्त्वां | सु | द | ति | तु | द | ति | त | द्व्या | ह | रा | ज्ञा | क | र | स्ते |
| ग | त्वा | कु | ल्या | म | न | स्तं | व्र | जि | तु | म | नु | न | ये | भा | नु | मे | त | ज्ज | ल | स्थम् |
| ब | द्धे | म | य्य | ञ्ज | ला | व | प्य | नु | न | य | वि | मु | खः | स्या | न्म | मै | क | ग्र | हो | ऽयं |
| द | त्त्वै | वा | भ्यां | त | द | म्भो | ञ्ज | लि | मि | ह | भ | व | तीं | प | श्य | मा | मे | ष्य | मा | णम् |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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