ऊर्ध्वस्ते रदनच्छदः स्मरधनुर्बन्धूकमालामयं
मौर्वी तत्र तवाधराधरतटाधःसीमलेखालता ।
एषा वागपि तावकी ननु धनुर्वेदः प्रिये मन्मथः
सोऽयं कोणधनुष्मतीभिरुचितं वीणाभिरभ्यस्यते ॥
ऊर्ध्वस्ते रदनच्छदः स्मरधनुर्बन्धूकमालामयं
मौर्वी तत्र तवाधराधरतटाधःसीमलेखालता ।
एषा वागपि तावकी ननु धनुर्वेदः प्रिये मन्मथः
सोऽयं कोणधनुष्मतीभिरुचितं वीणाभिरभ्यस्यते ॥
मौर्वी तत्र तवाधराधरतटाधःसीमलेखालता ।
एषा वागपि तावकी ननु धनुर्वेदः प्रिये मन्मथः
सोऽयं कोणधनुष्मतीभिरुचितं वीणाभिरभ्यस्यते ॥
अन्वयः
AI
प्रिये, ते ऊर्ध्वः रदनच्छदः स्मरधनुर्बन्धूकमालामयः (अस्ति) । तत्र तव अधराधरतटाधःसीमलेखालता मौर्वी (अस्ति) । एषा तावकी वाक् अपि ननु धनुर्वेदः (अस्ति) । सः अयम् मन्मथः कोणधनुष्मतीभिः वीणाभिः उचितम् अभ्यस्यते ।
Summary
AI
O beloved, your upper lip is Kama's bow, made of a garland of Bandhuka flowers. There, the vine-like line at the lower edge of your lower lip is the bowstring. Indeed, this speech of yours is the science of archery. This Kama is appropriately practiced with Vinas, which have plectrums for bows.
पदच्छेदः
AI
| ऊर्ध्वः | ऊर्ध्व (१.१) | The upper |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| रदनच्छदः | रदनच्छद (१.१) | lip |
| स्मरधनुर्बन्धूकमालामयः | स्मर–धनुस्–बन्धूक–माला–मयट् (१.१) | is made of a garland of Bandhuka flowers for Kama's bow |
| मौर्वी | मौर्वी (१.१) | The bowstring |
| तत्र | तत्र | there |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अधराधरतटाधःसीमलेखालता | अधर–अधर–तट–अधः–सीम–लेखा–लता (१.१) | the vine-like line at the lower edge of your lower lip |
| एषा | एतद् (१.१) | this |
| वाक् | वाच् (१.१) | speech |
| अपि | अपि | also |
| तावकी | तावक (१.१) | of yours |
| ननु | ननु | indeed |
| धनुर्वेदः | धनुर्वेद (१.१) | is the science of archery |
| प्रिये | प्रिया (८.१) | O beloved |
| मन्मथः | मन्मथ (१.१) | Kama |
| सः | तद् (१.१) | that |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| कोणधनुष्मतीभिः | कोण–धनुष्मत् (३.३) | with those having plectrums for bows |
| उचितम् | उचित (२.१) | appropriately |
| वीणाभिः | वीणा (३.३) | with Vinas (lutes) |
| अभ्यस्यते | अभ्यस्यते (अभि√अस् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is practiced |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऊ | र्ध्व | स्ते | र | द | न | च्छ | दः | स्म | र | ध | नु | र्ब | न्धू | क | मा | ला | म | यं |
| मौ | र्वी | त | त्र | त | वा | ध | रा | ध | र | त | टा | धः | सी | म | ले | खा | ल | ता |
| ए | षा | वा | ग | पि | ता | व | की | न | नु | ध | नु | र्वे | दः | प्रि | ये | म | न्म | थः |
| सो | ऽयं | को | ण | ध | नु | ष्म | ती | भि | रु | चि | तं | वी | णा | भि | र | भ्य | स्य | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.