परभृतयुवतीनां सम्यगायाति गातुं
न तव तरुणि वाणी यं सुधासिन्धुवेणी ।
कति न रसिककण्ठे कर्तुमभ्यस्यतेऽसौ
भवदुपविपिनाम्रे ताभिराम्रेडितेन ॥
परभृतयुवतीनां सम्यगायाति गातुं
न तव तरुणि वाणी यं सुधासिन्धुवेणी ।
कति न रसिककण्ठे कर्तुमभ्यस्यतेऽसौ
भवदुपविपिनाम्रे ताभिराम्रेडितेन ॥
न तव तरुणि वाणी यं सुधासिन्धुवेणी ।
कति न रसिककण्ठे कर्तुमभ्यस्यतेऽसौ
भवदुपविपिनाम्रे ताभिराम्रेडितेन ॥
अन्वयः
AI
तरुणि, तव वाणी यम् सुधासिन्धुवेणी (अस्ति), (तम्) परभृतयुवतीनाम् सम्यक् गातुम् न आयाति । असौ ताभिः भवदुपविपिनाम्रे आम्रेडितेन रसिककण्ठे कर्तुम् कति न अभ्यस्यते?
Summary
AI
O young lady, the young cuckoo-females cannot properly sing your speech, which is a stream from the ocean of nectar. How many times is it not practiced by them through repetition in the mango trees of the forest near you, in order to make it reside in the throats of connoisseurs?
पदच्छेदः
AI
| परभृतयुवतीनाम् | परभृत–युवती (६.३) | Of the young cuckoo-females |
| सम्यक् | सम्यक् | properly |
| आयाति | आयाति (आ√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is able |
| गातुम् | गातुम् (√गै+तुमुन्) | to sing |
| न | न | not |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| तरुणि | तरुणी (८.१) | O young lady |
| वाणी | वाणी (१.१) | speech |
| यम् | यद् (२.१) | which |
| सुधासिन्धुवेणी | सुधा–सिन्धु–वेणी (१.१) | is a stream from the ocean of nectar |
| कति | कति | how many times |
| न | न | not |
| रसिककण्ठे | रसिक–कण्ठ (७.१) | in the throat of connoisseurs |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to make (reside) |
| अभ्यस्यते | अभ्यस्यते (अभि√अस् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is practiced |
| असौ | अदस् (१.१) | this (speech) |
| भवदुपविपिनाम्रे | भवत्–उप–विपिन–आम्र (७.१) | in the mango tree of the forest near you |
| ताभिः | तद् (३.३) | by them |
| आम्रेडितेन | आम्रेडित (३.१) | by repetition |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | भृ | त | यु | व | ती | नां | स | म्य | गा | या | ति | गा | तुं |
| न | त | व | त | रु | णि | वा | णी | यं | सु | धा | सि | न्धु | वे | णी |
| क | ति | न | र | सि | क | क | ण्ठे | क | र्तु | म | भ्य | स्य | ते | ऽसौ |
| भ | व | दु | प | वि | पि | ना | म्रे | ता | भि | रा | म्रे | डि | ते | न |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.