वाणी मन्मथतीर्थमुज्ज्वलरसस्रोतस्वती कापि ते
खण्डः खण्ड इतीदमीयपुलिनस्यालप्यते वालुका ।
एतत्तीरमृदैव किं विरचिताः पूताः सिताश्चक्रिकाः
किं पीयूषमिदंपयांसि किमिदं तीरे तवैवाधरौ ॥
वाणी मन्मथतीर्थमुज्ज्वलरसस्रोतस्वती कापि ते
खण्डः खण्ड इतीदमीयपुलिनस्यालप्यते वालुका ।
एतत्तीरमृदैव किं विरचिताः पूताः सिताश्चक्रिकाः
किं पीयूषमिदंपयांसि किमिदं तीरे तवैवाधरौ ॥
खण्डः खण्ड इतीदमीयपुलिनस्यालप्यते वालुका ।
एतत्तीरमृदैव किं विरचिताः पूताः सिताश्चक्रिकाः
किं पीयूषमिदंपयांसि किमिदं तीरे तवैवाधरौ ॥
अन्वयः
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ते वाणी का अपि उज्ज्वलरसस्रोतस्वती मन्मथतीर्थम् (अस्ति) । खण्डः खण्डः इति इदम् ईयपुलिनस्य वालुका आलप्यते । एतत् तीरमृदा एव पूताः सिताः चक्रिकाः किम् विरचिताः? इदम् पयांसि पीयूषम् किम्? इदम् तीरे तव अधरौ एव किम्?
Summary
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Your speech is a unique sacred river of Kama, flowing with brilliant sentiment. The sand on its bank is called 'sugar candy, sugar candy'. Are the pure white sugar cakes made from the clay of this river's bank? Are its waters nectar? And on this bank, are these your two lips?
पदच्छेदः
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| वाणी | वाणी (१.१) | The speech |
| मन्मथतीर्थम् | मन्मथ–तीर्थ (१.१) | a sacred river of Kama |
| उज्ज्वलरसस्रोतस्वती | उज्ज्वल–रस–स्रोतस्वती (१.१) | a river flowing with brilliant sentiment |
| का | का (१.१) | a certain |
| अपि | अपि | unique |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| खण्डः | खण्ड (१.१) | sugar candy |
| खण्डः | खण्ड (१.१) | sugar candy |
| इति | इति | thus |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| ईयपुलिनस्य | ईय–पुलिन (६.१) | of its bank |
| आलप्यते | आलप्यते (आ√लप् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
| वालुका | वालुका (१.१) | the sand |
| एतत् | एतद् (६.१) | of this |
| तीरमृदा | तीर–मृद् (३.१) | with the clay of the bank |
| एव | एव | itself |
| किम् | किम् | are |
| विरचिताः | विरचित (वि√रच्+क्त, १.३) | made |
| पूताः | पूत (√पू+क्त, १.३) | pure |
| सिताः | सिता (१.३) | white |
| चक्रिकाः | चक्रिका (१.३) | sugar cakes |
| किम् | किम् | is |
| पीयूषम् | पीयूष (१.१) | nectar |
| इदम् | इदम् (१.१) | these |
| पयांसि | पयस् (१.३) | waters |
| किम् | किम् | are |
| इदम् | इदम् (१.१) | these |
| तीरे | तीर (७.१) | on the bank |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| एव | एव | indeed |
| अधरौ | अधर (१.२) | two lips |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | णी | म | न्म | थ | ती | र्थ | मु | ज्ज्व | ल | र | स | स्रो | त | स्व | ती | का | पि | ते |
| ख | ण्डः | ख | ण्ड | इ | ती | द | मी | य | पु | लि | न | स्या | ल | प्य | ते | वा | लु | का |
| ए | त | त्ती | र | मृ | दै | व | किं | वि | र | चि | ताः | पू | ताः | सि | ता | श्च | क्रि | काः |
| किं | पी | यू | ष | मि | दं | प | यां | सि | कि | मि | दं | ती | रे | त | वै | वा | ध | रौ |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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