आस्ये या तव भारती वसति तल्लीलारविन्दोल्लस-
द्वासे तत्कलवैणनिक्वणमिलद्वाणीविलासामृते ।
तत्केलिभ्रमणार्हगैरिकसुधानिर्माणहर्म्याधरे
तन्मुक्तामणिहार एव किमयं दन्तस्रजौ राजतः ॥
आस्ये या तव भारती वसति तल्लीलारविन्दोल्लस-
द्वासे तत्कलवैणनिक्वणमिलद्वाणीविलासामृते ।
तत्केलिभ्रमणार्हगैरिकसुधानिर्माणहर्म्याधरे
तन्मुक्तामणिहार एव किमयं दन्तस्रजौ राजतः ॥
द्वासे तत्कलवैणनिक्वणमिलद्वाणीविलासामृते ।
तत्केलिभ्रमणार्हगैरिकसुधानिर्माणहर्म्याधरे
तन्मुक्तामणिहार एव किमयं दन्तस्रजौ राजतः ॥
अन्वयः
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तव आस्ये या भारती वसति, तत् लीलारविन्दोल्लसद्वासे, तत् कलवैणनिक्वणमिलद्वाणीविलासामृते, तत् केलिभ्रमणार्हगैरिकसुधानिर्माणहर्म्याधरे, अयम् दन्तस्रजौ तत् मुक्तामणिहारः एव किम् राजतः?
Summary
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The goddess of speech, Bharati, resides in your mouth—in that abode fragrant like her playfully held lotus, in that nectar of her speech mixed with the sweet sounds of her lute, on that lower lip which is a palace fit for her strolls. Are these two rows of your teeth her pearl necklace, shining there?
पदच्छेदः
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| आस्ये | आस्य (७.१) | In the mouth |
| या | यद् (१.१) | which |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| भारती | भारती (१.१) | Saraswati (goddess of speech) |
| वसति | वसति (√वस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | resides |
| तत् | तद् (६.१) | her |
| लीलारविन्दोल्लसद्वासे | लीला–अरविन्द–उल्लसत्–वास (७.१) | in the abode fragrant like her playfully held lotus |
| तत् | तद् (६.१) | her |
| कलवैणनिक्वणमिलद्वाणीविलासामृते | कल–वैण–निक्कण–मिलत्–वाणी–विलास–अमृत (७.१) | in the nectar of her speech-play mixed with the sweet sounds of her lute |
| तत् | तद् (६.१) | her |
| केलिभ्रमणार्हगैरिकसुधानिर्माणहर्म्याधरे | केलि–भ्रमण–अर्ह–गैरिक–सुधा–निर्माण–हर्म्य–अधर (७.१) | on the lower lip which is a palace built of nectar and red chalk fit for her playful strolls |
| तत् | तद् (६.१) | her |
| मुक्तामणिहारः | मुक्तामणि–हार (१.१) | pearl necklace |
| एव | एव | indeed |
| किम् | किम् | is it that |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| दन्तस्रजौ | दन्तस्रज् (१.२) | two rows of teeth |
| राजतः | राजतः (√राज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | shine |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | स्ये | या | त | व | भा | र | ती | व | स | ति | त | ल्ली | ला | र | वि | न्दो | ल्ल | स |
| द्वा | से | त | त्क | ल | वै | ण | नि | क्व | ण | मि | ल | द्वा | णी | वि | ला | सा | मृ | ते |
| त | त्के | लि | भ्र | म | णा | र्ह | गै | रि | क | सु | धा | नि | र्मा | ण | ह | र्म्या | ध | रे |
| त | न्मु | क्ता | म | णि | हा | र | ए | व | कि | म | यं | द | न्त | स्र | जौ | रा | ज | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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