एषा रतिः स्फुरति चेतसि कस्य यस्याः
सूते रतिं द्युतिरथ त्वयि वा तनोति ।
त्रैयक्षवीक्षणखिलीकृतनिर्जरत्व-
सिद्धायुरध्वमकरध्वजसंशयं कः ॥
एषा रतिः स्फुरति चेतसि कस्य यस्याः
सूते रतिं द्युतिरथ त्वयि वा तनोति ।
त्रैयक्षवीक्षणखिलीकृतनिर्जरत्व-
सिद्धायुरध्वमकरध्वजसंशयं कः ॥
सूते रतिं द्युतिरथ त्वयि वा तनोति ।
त्रैयक्षवीक्षणखिलीकृतनिर्जरत्व-
सिद्धायुरध्वमकरध्वजसंशयं कः ॥
अन्वयः
AI
यस्याः द्युतिः रतिं सूते, अथ वा त्वयि रतिं तनोति, एषा रतिः कस्य चेतसि न स्फुरति? त्रैयक्ष-वीक्षण-खिलीकृत-निर्जरत्व-सिद्ध-आयुः-अध्व-मकरध्वज-संशयम् कः न करोति?
Summary
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Whose mind does not imagine this lady to be Rati herself, whose radiance produces delight or creates love in you? Seeing her, who would not suspect that Kamadeva, whose immortality was destroyed by Shiva's glance, has been reborn?
पदच्छेदः
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| एषा | एतद् (१.१) | This |
| रतिः | रति (१.१) | Rati (or, delight) |
| स्फुरति | स्फुरति (√स्फुर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| चेतसि | चेतस् (७.१) | in the mind |
| कस्य | किम् (६.१) | of whom |
| यस्याः | यद् (६.१) | whose |
| सूते | सूते (√सू कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | produces |
| रतिं | रति (२.१) | delight |
| द्युतिः | द्युति (१.१) | radiance |
| अथ | अथ | or |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | in you |
| वा | वा | or |
| तनोति | तनोति (√तन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | creates |
| त्रैयक्षवीक्षणखिलीकृतनिर्जरत्वसिद्धायुरध्वमकरध्वजसंशयं | त्रैयक्ष–वीक्षण–खिलीकृ–निर्जरत्व–सिद्ध–आयुस्–अध्वन्–मकरध्वज–संशय (२.१) | a doubt about Kamadeva, whose path to immortal life was destroyed by Shiva's glance |
| कः | किम् (१.१) | who |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | षा | र | तिः | स्फु | र | ति | चे | त | सि | क | स्य | य | स्याः |
| सू | ते | र | तिं | द्यु | ति | र | थ | त्व | यि | वा | त | नो | ति |
| त्रै | य | क्ष | वी | क्ष | ण | खि | ली | कृ | त | नि | र्ज | र | त्व |
| सि | द्धा | यु | र | ध्व | म | क | र | ध्व | ज | सं | श | यं | कः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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