विश्वरूप कृतविश्व कियत्ते
वैभवाद्भुतमणौ हृदि कुर्वे ।
हेम नह्यति कियन्निजचीरे
काञ्चनाद्रिमधिगत्य दरिद्रः ॥
विश्वरूप कृतविश्व कियत्ते
वैभवाद्भुतमणौ हृदि कुर्वे ।
हेम नह्यति कियन्निजचीरे
काञ्चनाद्रिमधिगत्य दरिद्रः ॥
वैभवाद्भुतमणौ हृदि कुर्वे ।
हेम नह्यति कियन्निजचीरे
काञ्चनाद्रिमधिगत्य दरिद्रः ॥
अन्वयः
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विश्वरूप! कृतविश्व! ते वैभवाद्भुतमणौ (मध्ये) कियत् हृदि कुर्वे? दरिद्रः काञ्चनाद्रिम् अधिगत्य निजचीरे कियत् हेम नह्यति?
Summary
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O universal form, creator of the universe! How little can I hold in my heart from the wondrous jewel-mine of your glory? Just as a poor man, having reached the golden mountain, can tie only a little gold in his tattered cloth.
पदच्छेदः
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| विश्वरूप | विश्वरूप (८.१) | O universal form |
| कृतविश्व | कृत–विश्व (८.१) | O creator of the universe |
| कियत् | कियत् (२.१) | how much |
| ते | युष्मद् (६.१) | of your |
| वैभवाद्भुतमणौ | वैभव–अद्भुत–मणि (७.१) | in the wonderful jewel of glory |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| कुर्वे | कुर्वे (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I place |
| हेम | हेमन् (२.१) | gold |
| नह्यति | नह्यति (√नह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | ties |
| कियत् | कियत् (२.१) | how much |
| निजचीरे | निज–चीर (७.१) | in his own tattered cloth |
| काञ्चनाद्रिम् | काञ्चन–अद्रि (२.१) | the golden mountain |
| अधिगत्य | अधिगत्य (अधि√गम्+ल्यप्) | having reached |
| दरिद्रः | दरिद्र (१.१) | a poor man |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | श्व | रू | प | कृ | त | वि | श्व | कि | य | त्ते |
| वै | भ | वा | द्भु | त | म | णौ | हृ | दि | कु | र्वे |
| हे | म | न | ह्य | ति | कि | य | न्नि | ज | ची | रे |
| का | ञ्च | ना | द्रि | म | धि | ग | त्य | द | रि | द्रः |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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