अचकथदथ बन्दिसुन्दरी द्वाः-
सविधमुपेत्य नलाय मध्यमह्नः ।
जय नृप दिनयौवनोष्मतप्ता-
प्लवनजलानि पिपासति क्षितिस्ते ॥
अचकथदथ बन्दिसुन्दरी द्वाः-
सविधमुपेत्य नलाय मध्यमह्नः ।
जय नृप दिनयौवनोष्मतप्ता-
प्लवनजलानि पिपासति क्षितिस्ते ॥
सविधमुपेत्य नलाय मध्यमह्नः ।
जय नृप दिनयौवनोष्मतप्ता-
प्लवनजलानि पिपासति क्षितिस्ते ॥
अन्वयः
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अथ बन्दिसुन्दरी द्वाःसविधम् उपेत्य नलाय अह्नः मध्यमम् अचकथत् । नृप जय । दिनयौवनोष्मतप्ता ते क्षितिः आप्लवनजलानि पिपासति ।
Summary
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Then, a beautiful female bard, approaching the door, announced the midday to Nala: "Be victorious, O King! Your kingdom, heated by the warmth of the day's youth (midday), desires the waters of your royal bath."
पदच्छेदः
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| अचकथत् | अचकथत् (√कथ् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| अथ | अथ | then |
| बन्दिसुन्दरी | बन्दिसुन्दरी (१.१) | a beautiful female bard |
| द्वाःसविधम् | द्वाःसविध (२.१) | near the door |
| उपेत्य | उपेत्य (उप√इ+ल्यप्) | having approached |
| नलाय | नल (४.१) | to Nala |
| मध्यमम् | मध्यम (२.१) | the middle |
| अह्नः | अहन् (६.१) | of the day |
| जय | जय (√जि कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be victorious |
| नृप | नृप (८.१) | O king |
| दिनयौवनोष्मतप्ता | दिन–यौवन–उष्मन्–तप्ता (१.१) | heated by the warmth of the day's youth |
| आप्लवनजलानि | आप्लवन–जल (२.३) | bathing waters |
| पिपासति | पिपासति (√पा +सन्+उ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wishes to drink |
| क्षितिः | क्षिति (१.१) | the earth (kingdom) |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | च | क | थ | द | थ | ब | न्दि | सु | न्द | री | द्वाः | |
| स | वि | ध | मु | पे | त्य | न | ला | य | म | ध्य | म | ह्नः |
| ज | य | नृ | प | दि | न | यौ | व | नो | ष्म | त | प्ता | |
| प्ल | व | न | ज | ला | नि | पि | पा | स | ति | क्षि | ति | स्ते |
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