अन्वयः
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या चित्रमयी (अस्ति), सा स्थिति-शालि-समस्त-वर्णताम् कथम् न बिभर्तु? या कलित-अनल्प-मुख-अरवा (अस्ति), सा कथम् स्वर-भेदम् न उपैतु वा?
Summary
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How could that city, which was full of pictures (चित्रमयी), not possess all the established social classes (समस्तवर्णताम्)? And how could it not have discord (स्वरभेदम्), when it was filled with the great clamor from many mouths (कलितानल्पमुखारवा)? (This verse uses puns: 'चित्रमयी' also means 'wonderful', 'वर्णता' means 'colors', and 'स्वरभेद' means 'variety of musical notes').
पदच्छेदः
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| स्थितिशालिसमस्तवर्णताम् | स्थिति–शालिन्–समस्त–वर्णता (२.१) | the state of having all established social classes |
| न | न | not |
| कथम् | कथम् | how |
| चित्रमयी | चित्रमयी (१.१) | full of pictures / wonderful |
| बिभर्तु | बिभर्तु (√भृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should bear |
| या | यद् (१.१) | which (city) |
| स्वरभेदम् | स्वर–भेद (२.१) | discord / variety of musical notes |
| उपैतु | उपैतु (उप√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should attain |
| या | यद् (१.१) | which (city) |
| कथम् | कथम् | how |
| कलितानल्पमुखारवा | कलित (√कल्+क्त)–अनल्प–मुख–अरव (१.१) | possessing the great clamor from many mouths |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्थि | ति | शा | लि | स | म | स्त | व | र्ण | तां | |
| न | क | थं | चि | त्र | म | यी | बि | भ | र्तु | या |
| स्व | र | भे | द | मु | पै | तु | या | क | थं | |
| क | लि | ता | न | ल्प | मु | खा | र | वा | न | वा |
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