विधुकरपरिरम्भादात्मनिष्यन्दपूर्णैः
शशिदृषदुपक्लृप्तैरालवालैस्तरूणाम् ।
विफलितजलसेकप्रक्रियागौरवेण
व्यरचि स हृतचित्तस्तत्र भैमीवनेन ॥
विधुकरपरिरम्भादात्मनिष्यन्दपूर्णैः
शशिदृषदुपक्लृप्तैरालवालैस्तरूणाम् ।
विफलितजलसेकप्रक्रियागौरवेण
व्यरचि स हृतचित्तस्तत्र भैमीवनेन ॥
शशिदृषदुपक्लृप्तैरालवालैस्तरूणाम् ।
विफलितजलसेकप्रक्रियागौरवेण
व्यरचि स हृतचित्तस्तत्र भैमीवनेन ॥
अन्वयः
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तत्र सः भैमी-वनेन हृत-चित्तः व्यरचि। (केन भैमीवनेन?) तरूणाम् विधु-कर-परिरम्भात् आत्म-निष्यन्द-पूर्णैः शशि-दृषत्-उपक्लृप्तैः आलवालैः विफलित-जल-सेक-प्रक्रिया-गौरवेण (भैमीवनेन)।
Summary
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There, he (Nala) was captivated by Damayanti's garden, which rendered futile the great effort of watering. This was because the basins of the trees, made of moonstone, were filled with their own moisture, exuded due to the embrace of the moon's rays.
पदच्छेदः
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| विधुकरपरिरम्भात् | विधु–कर–परिरम्भ (५.१) | from the embrace of the moon's rays |
| आत्मनिष्यन्दपूर्णैः | आत्मन्–निष्यन्द–पूर्ण (३.३) | by those filled with their own exudation |
| शशिदृषदुपक्लृप्तैः | शशिन्–दृषद्–उपक्लृप्त (उप√कॢप्+क्त, ३.३) | by those made of moonstone |
| आलवालैः | आलवाल (३.३) | by the basins |
| तरूणाम् | तरु (६.३) | of the trees |
| विफलितजलसेकप्रक्रियागौरवेण | विफलित–जल–सेक–प्रक्रिया–गौरव (३.१) | by the one which rendered futile the great effort of the process of watering |
| व्यरचि | व्यरचि (वि√रच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| सः | तद् (१.१) | he (Nala) |
| हृतचित्तः | हृत (√हृ+क्त)–चित्त (१.१) | captivated |
| तत्र | तत्र | there |
| भैमीवनेन | भैमी–वन (३.१) | by Damayanti's garden |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धु | क | र | प | रि | र | म्भा | दा | त्म | नि | ष्य | न्द | पू | र्णैः |
| श | शि | दृ | ष | दु | प | क्लृ | प्तै | रा | ल | वा | लै | स्त | रू | णाम् |
| वि | फ | लि | त | ज | ल | से | क | प्र | क्रि | या | गौ | र | वे | ण |
| व्य | र | चि | स | हृ | त | चि | त्त | स्त | त्र | भै | मी | व | ने | न |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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