स्वप्राणेश्वरनर्महर्म्यकटकातिथ्यग्रहायोत्सुकं
पाथोदं निजकेलिसौधशिखरादारुह्य यत्कामिनी ।
साक्षादप्सरसो विमानकलितव्योमान एवाभव-
द्यन्न प्रायनिमेषमभ्रतरसा यान्ती रसादध्वनि ॥
स्वप्राणेश्वरनर्महर्म्यकटकातिथ्यग्रहायोत्सुकं
पाथोदं निजकेलिसौधशिखरादारुह्य यत्कामिनी ।
साक्षादप्सरसो विमानकलितव्योमान एवाभव-
द्यन्न प्रायनिमेषमभ्रतरसा यान्ती रसादध्वनि ॥
पाथोदं निजकेलिसौधशिखरादारुह्य यत्कामिनी ।
साक्षादप्सरसो विमानकलितव्योमान एवाभव-
द्यन्न प्रायनिमेषमभ्रतरसा यान्ती रसादध्वनि ॥
अन्वयः
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यत्-कामिनी निज-केलि-सौध-शिखरात् स्व-प्राण-ईश्वर-नर्म-हर्म्य-कटक-आतिथ्य-ग्रहाय-उत्सुकम् पाथोदम् आरुह्य, अभ्र-तरसा अध्वनि रसात् यान्ती (सती), यत् प्राय-निमेषम् न (अकरोत्), तस्मात् साक्षात् विमान-कलित-व्योमानः अप्सरसः एव अभवत् ।
Summary
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A lady of that city, climbing from her pleasure-mansion onto a cloud eager for the hospitality of her lover's palace, became a veritable Apsaras in her aerial car. This was because, traveling swiftly and with delight, she did not blink her eyes, a trait of celestial beings.
पदच्छेदः
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| स्वप्राणेश्वरनर्महर्म्यकटकातिथ्यग्रहायोत्सुकं | स्व–प्राणेश्वर–नर्मन्–हर्म्य–कटक–आतिथ्य–ग्रह–उत्सुक (२.१) | eager to receive the hospitality of her lover's pleasure-palace on the mountain slope |
| पाथोदं | पाथोद (२.१) | a cloud |
| निजकेलिसौधशिखरात् | निज–केलि–सौध–शिखर (५.१) | from the peak of her own pleasure-mansion |
| आरुह्य | आरुह्य (आ√रुह्+ल्यप्) | having climbed |
| यत्कामिनी | यद्–कामिनी (१.१) | a lady of which (city) |
| साक्षात् | साक्षात् | veritable |
| अप्सरसः | अप्सरस् (१.१) | Apsaras |
| विमानकलितव्योमानः | विमान–कलित–व्योमन् (१.१) | one who has occupied the sky with an aerial car |
| एव | एव | indeed |
| अभवत् | अभवत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| यत् | यत् | because |
| न | न | not |
| प्रायनिमेषम् | प्राय–निमेष (२.१) | blinking of the eyes |
| अभ्रतरसा | अभ्र–तरस् (३.१) | with the speed of a cloud |
| यान्ती | यान्त् (√या+शतृ, १.१) | going |
| रसात् | रस (५.१) | with delight |
| अध्वनि | अध्वन् (७.१) | on the path |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | प्रा | णे | श्व | र | न | र्म | ह | र्म्य | क | ट | का | ति | थ्य | ग्र | हा | यो | त्सु | कं |
| पा | थो | दं | नि | ज | के | लि | सौ | ध | शि | ख | रा | दा | रु | ह्य | य | त्का | मि | नी |
| सा | क्षा | द | प्स | र | सो | वि | मा | न | क | लि | त | व्यो | मा | न | ए | वा | भ | व |
| द्य | न्न | प्रा | य | नि | मे | ष | म | भ्र | त | र | सा | या | न्ती | र | सा | द | ध्व | नि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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