व्रजति कुमुदे दृष्ट्वा मोहं दृशोरपिधायके
भवति च नले दूरं तारापतौ च हतौजसि ।
लघु रघुपतेर्जायां मायामयीमिव रावणि-
स्तिमिरचिकुरग्राहं रात्रिं हिनस्ति गभस्तिराट् ॥
व्रजति कुमुदे दृष्ट्वा मोहं दृशोरपिधायके
भवति च नले दूरं तारापतौ च हतौजसि ।
लघु रघुपतेर्जायां मायामयीमिव रावणि-
स्तिमिरचिकुरग्राहं रात्रिं हिनस्ति गभस्तिराट् ॥
भवति च नले दूरं तारापतौ च हतौजसि ।
लघु रघुपतेर्जायां मायामयीमिव रावणि-
स्तिमिरचिकुरग्राहं रात्रिं हिनस्ति गभस्तिराट् ॥
अन्वयः
AI
कुमुदे मोहं व्रजति (सति), दृशोः अपिधायके नले (च) दृष्ट्वा, तारा-पतौ च दूरं हत-ओजसि भवति (सति), गभस्ति-राट्, रावणिः रघु-पतेः माया-मयीम् जायाम् इव, रात्रिम् तिमिर-चिकुर-ग्राहम् लघु हिनस्ति।
Summary
AI
As the night-lotus faints, as Nala becomes a cover for the eyes (of Damayanti), and as the lord of stars (the moon) becomes completely devoid of splendor, the king of rays (the sun) quickly destroys the night, seizing her by her hair of darkness, just as Indrajit seized the illusory wife of Rama.
पदच्छेदः
AI
| व्रजति | व्रजति (√व्रज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes |
| कुमुदे | कुमुद (७.१) | the night-lotus |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| मोहम् | मोह (२.१) | to fainting |
| दृशोः | दृश् (६.२) | of the eyes |
| अपिधायके | अपिधायक (७.१) | as a cover |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes |
| च | च | and |
| नले | नल (७.१) | Nala |
| दूरम् | दूरम् | completely |
| तारापतौ | तारापति (७.१) | the lord of stars (moon) |
| च | च | and |
| हतौजसि | हतौजस् (७.१) | devoid of splendor |
| लघु | लघु | quickly |
| रघुपतेः | रघुपति (६.१) | of Rama |
| जायाम् | जाया (२.१) | wife |
| मायामयीम् | मायामयी (२.१) | illusory |
| इव | इव | like |
| रावणिः | रावणि (१.१) | Indrajit |
| तिमिरचिकुरग्राहम् | तिमिर–चिकुर–ग्राहम् | grasping the hair of darkness |
| रात्रिम् | रात्रि (२.१) | the night |
| हिनस्ति | हिनस्ति (√हिंस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | destroys |
| गभस्तिराट् | गभस्तिराट् (१.१) | the king of rays (the sun) |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्र | ज | ति | कु | मु | दे | दृ | ष्ट्वा | मो | हं | दृ | शो | र | पि | धा | य | के |
| भ | व | ति | च | न | ले | दू | रं | ता | रा | प | तौ | च | ह | तौ | ज | सि |
| ल | घु | र | घु | प | ते | र्जा | यां | मा | या | म | यी | मि | व | रा | व | णि |
| स्ति | मि | र | चि | कु | र | ग्रा | हं | रा | त्रिं | हि | न | स्ति | ग | भ | स्ति | राट् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.