आगच्छन्भणतामुषाः क्षाणमथातिथ्यं दृशोरानशे
स्वर्गङ्गाम्बुनि बन्दिनी कृतदिनारम्भाप्लुतिर्भूपतिः ।
आनन्दादतिपुष्पकं रथमधिष्ठाय प्रियायौतके
प्राप्तं तैरवरागतैरविदितप्रासादतो निर्गमः ॥
आगच्छन्भणतामुषाः क्षाणमथातिथ्यं दृशोरानशे
स्वर्गङ्गाम्बुनि बन्दिनी कृतदिनारम्भाप्लुतिर्भूपतिः ।
आनन्दादतिपुष्पकं रथमधिष्ठाय प्रियायौतके
प्राप्तं तैरवरागतैरविदितप्रासादतो निर्गमः ॥
स्वर्गङ्गाम्बुनि बन्दिनी कृतदिनारम्भाप्लुतिर्भूपतिः ।
आनन्दादतिपुष्पकं रथमधिष्ठाय प्रियायौतके
प्राप्तं तैरवरागतैरविदितप्रासादतो निर्गमः ॥
अन्वयः
AI
अथ भूपतिः आगच्छन्-भणताम् (वन्दिनाम्) उषः-क्षणम् दृशोः आतिथ्यम् आनशे । सः स्वर्गङ्गा-अम्बुनि कृत-दिन-आरम्भ-आप्लुतिः (सन्), आनन्दात् प्रिया-यौतके प्राप्तम् अतिपुष्पकम् रथम् अधिष्ठाय, तैः अवरागतैः (सह) अविदित-प्रासादतः निर्गमः (चक्रे) ।
Summary
AI
Then, the king, who had performed his morning ablutions in the waters of the celestial Ganga as proclaimed by the bards, enjoyed for a moment the hospitality for his eyes at dawn. Mounting with joy the 'Atipushpaka' chariot, received as part of his beloved's dowry, his departure from the palace, accompanied by those who had descended, was unknown.
पदच्छेदः
AI
| आगच्छन् | आगच्छत् (आ√गम्+शतृ) | coming |
| भणताम् | भणत् (√भण्+शतृ, ६.३) | of those who were speaking |
| उषः | उषस् | dawn's |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | moment |
| अथ | अथ | then |
| आतिथ्यम् | आतिथ्य (२.१) | the hospitality |
| दृशोः | दृश् (६.२) | for the eyes |
| आनशे | आनशे (√अश् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | enjoyed |
| स्वर्गङ्गा | स्वर्गङ्गा | celestial Ganga's |
| अम्बुनि | अम्बु (७.१) | in the water |
| बन्दिनी | बन्दिन् | by the bards |
| कृत | कृत (√कृ+क्त) | performed |
| दिन | दिन | day's |
| आरम्भ | आरम्भ | beginning |
| आप्लुतिः | आप्लुति (१.१) | whose bath |
| भूपतिः | भूपति (१.१) | the king |
| आनन्दात् | आनन्द (५.१) | from joy |
| अतिपुष्पकम् | अतिपुष्पक (२.१) | Atipushpaka |
| रथम् | रथ (२.१) | chariot |
| अधिष्ठाय | अधिष्ठाय (अधि√स्था+ल्यप्) | having mounted |
| प्रिया | प्रिया | beloved's |
| यौतके | यौतक (७.१) | in the dowry |
| प्राप्तम् | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, २.१) | received |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| अवरागतैः | अवरागत (अव+आ√गम्+क्त, ३.३) | who had descended |
| अविदित | अविदित (√विद्+क्त) | unknown |
| प्रासादतः | प्रासाद (५.१) | from the palace |
| निर्गमः | निर्गम (निर्√गम्+अ, १.१) | whose departure |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | ग | च्छ | न्भ | ण | ता | मु | षाः | क्षा | ण | म | था | ति | थ्यं | दृ | शो | रा | न | शे |
| स्व | र्ग | ङ्गा | म्बु | नि | ब | न्दि | नी | कृ | त | दि | ना | र | म्भा | प्लु | ति | र्भू | प | तिः |
| आ | न | न्दा | द | ति | पु | ष्प | कं | र | थ | म | धि | ष्ठा | य | प्रि | या | यौ | त | के |
| प्रा | प्तं | तै | र | व | रा | ग | तै | र | वि | दि | त | प्रा | सा | द | तो | नि | र्ग | मः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.