दूरारूढस्तिमिरजलधेर्वाडवश्चित्रभानु-
र्भानुस्ताम्यद्वनरुहवनीकेलिवैहासिकोऽयम् ।
न स्वात्मीयं किमिति दधते भास्वरश्वेतिमानं
द्यामद्यापि द्युमणिकरणश्रेणयः शोणयन्ति ॥
दूरारूढस्तिमिरजलधेर्वाडवश्चित्रभानु-
र्भानुस्ताम्यद्वनरुहवनीकेलिवैहासिकोऽयम् ।
न स्वात्मीयं किमिति दधते भास्वरश्वेतिमानं
द्यामद्यापि द्युमणिकरणश्रेणयः शोणयन्ति ॥
र्भानुस्ताम्यद्वनरुहवनीकेलिवैहासिकोऽयम् ।
न स्वात्मीयं किमिति दधते भास्वरश्वेतिमानं
द्यामद्यापि द्युमणिकरणश्रेणयः शोणयन्ति ॥
अन्वयः
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अयम् चित्रभानुः भानुः तिमिर-जलधेः दूर-आरूढः वाडवः (अस्ति), तथा ताम्यत्-वनरुह-वनी-केलि-वैहासिकः (अस्ति) । द्युमणि-करण-श्रेणयः भास्वर-श्वेतिमानम् स्व-आत्मीयम् किम् इति न दधते? यतः ताः अद्य अपि द्याम् शोणयन्ति ।
Summary
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This radiant sun is the submarine fire that has risen high from the ocean of darkness, and a jester in the sport of the languishing lotus groves. Why do the rows of the sun's rays not assume their own brilliant whiteness? Even now, they continue to redden the sky.
पदच्छेदः
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| दूर | दूर | high |
| आरूढः | आरूढ (आ√रुह्+क्त, १.१) | ascended |
| तिमिर | तिमिर | of darkness |
| जलधेः | जलधि (६.१) | from the ocean |
| वाडवः | वाडव (१.१) | the submarine fire |
| चित्रभानुः | चित्रभानु (१.१) | the radiant one (sun) |
| भानुः | भानु (१.१) | the sun |
| ताम्यत् | ताम्यत् (√तम्+शतृ) | languishing |
| वनरुह | वनरुह | lotus |
| वनी | वनी | grove |
| केलि | केलि | in the sport |
| वैहासिकः | वैहासिक (१.१) | a jester |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| न | न | not |
| स्व-आत्मीयम् | स्वात्मीय (२.१) | their own |
| किम् | किम् | why |
| इति | इति | thus |
| दधते | दधते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | do they assume |
| भास्वर | भास्वर | brilliant |
| श्वेतिमानम् | श्वेतिमन् (२.१) | whiteness |
| द्याम् | दिव् (२.१) | the sky |
| अद्य | अद्य | now |
| अपि | अपि | even |
| द्युमणि | द्युमणि | of the sun (jewel of the sky) |
| करण | करण | ray |
| श्रेणयः | श्रेणि (१.३) | the rows |
| शोणयन्ति | शोणयन्ति (√शुण् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | make red |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दू | रा | रू | ढ | स्ति | मि | र | ज | ल | धे | र्वा | ड | व | श्चि | त्र | भा | नु |
| र्भा | नु | स्ता | म्य | द्व | न | रु | ह | व | नी | के | लि | वै | हा | सि | को | ऽयम् |
| न | स्वा | त्मी | यं | कि | मि | ति | द | ध | ते | भा | स्व | र | श्वे | ति | मा | नं |
| द्या | म | द्या | पि | द्यु | म | णि | क | र | ण | श्रे | ण | यः | शो | ण | य | न्ति |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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