दाक्षीपुत्रस्य तन्त्रे ध्रुवमयमभवत्कोऽप्यधीती कपोतः
कण्ठे शब्दौघसिद्धिक्षतबहुकठिनीशेषभूषानुयातः ।
सर्वं विस्मृत्य दैवात्स्मृतिमुषसि गतां घोषयन्यो घुसंज्ञां
प्राक्संस्कारेण संप्रत्यपि धुवति शिरः पट्टिकापाठजेन ॥
दाक्षीपुत्रस्य तन्त्रे ध्रुवमयमभवत्कोऽप्यधीती कपोतः
कण्ठे शब्दौघसिद्धिक्षतबहुकठिनीशेषभूषानुयातः ।
सर्वं विस्मृत्य दैवात्स्मृतिमुषसि गतां घोषयन्यो घुसंज्ञां
प्राक्संस्कारेण संप्रत्यपि धुवति शिरः पट्टिकापाठजेन ॥
कण्ठे शब्दौघसिद्धिक्षतबहुकठिनीशेषभूषानुयातः ।
सर्वं विस्मृत्य दैवात्स्मृतिमुषसि गतां घोषयन्यो घुसंज्ञां
प्राक्संस्कारेण संप्रत्यपि धुवति शिरः पट्टिकापाठजेन ॥
अन्वयः
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यः कण्ठे शब्द-ओघ-सिद्धि-क्षत-बहु-कठिनी-शेष-भूषा-अनुयातः (सन्) सर्वम् विस्मृत्य, दैवात् उषसि गताम् स्मृतिम् (इव) घु-संज्ञाम् घोषयन्, पट्टिका-पाठ-जेन प्राक्-संस्कारेण सम्प्रति अपि शिरः धुवति, अयम् कः अपि अधीती कपोतः ध्रुवम् दाक्षीपुत्रस्य तन्त्रे अभवत् ।
Summary
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This pigeon, who, having forgotten everything, now proclaims the grammatical term 'ghu' at dawn like a memory returning by fate, and even now shakes its head due to the past impression born from reciting from a slate, must certainly have been a student in Panini's grammatical system. Its throat is adorned with the remnants of many chalk sticks, worn out by mastering a multitude of words.
पदच्छेदः
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| दाक्षीपुत्रस्य | दाक्षीपुत्र (६.१) | of the son of Dakshi (Panini) |
| तन्त्रे | तन्त्र (७.१) | in the system of |
| ध्रुवम् | ध्रुवम् | certainly |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अभवत् | अभवत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| कः | किम् (१.१) | some |
| अपि | अपि | indeed |
| अधीती | अधीतिन् (१.१) | student |
| कपोतः | कपोत (१.१) | pigeon |
| कण्ठे | कण्ठ (७.१) | in the throat |
| शब्द | शब्द | of words |
| ओघ | ओघ | multitude |
| सिद्धि | सिद्धि | by the mastery |
| क्षत | क्षत (√क्षि+क्त) | worn out |
| बहु | बहु | many |
| कठिनी | कठिनी | chalk |
| शेष | शेष | by the remnants |
| भूषा | भूषा | as an ornament |
| अनुयातः | अनुयात (अनु√या+क्त, १.१) | followed by |
| सर्वम् | सर्व (२.१) | everything |
| विस्मृत्य | विस्मृत्य (वि√स्मृ+ल्यप्) | having forgotten |
| दैवात् | दैवात् | by fate |
| स्मृतिम् | स्मृति (२.१) | memory |
| उषसि | उषस् (७.१) | at dawn |
| गताम् | गता (√गम्+क्त, २.१) | returned |
| घोषयन् | घोषयन् (√घुष्+णिच्+शतृ, १.१) | proclaiming |
| यः | यद् (१.१) | who |
| घुसंज्ञाम् | घुसंज्ञा (२.१) | the term 'ghu' |
| प्राक्संस्कारेण | प्राक्–संस्कार (३.१) | by the past impression |
| सम्प्रति | सम्प्रति | now |
| अपि | अपि | even |
| धुवति | धुवति (√धु कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shakes |
| शिरः | शिरस् (२.१) | head |
| पट्टिकापाठजेन | पट्टिका–पाठ–ज (३.१) | born from recitation from a slate |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दा | क्षी | पु | त्र | स्य | त | न्त्रे | ध्रु | व | म | य | म | भ | व | त्को | ऽप्य | धी | ती | क | पो | तः |
| क | ण्ठे | श | ब्दौ | घ | सि | द्धि | क्ष | त | ब | हु | क | ठि | नी | शे | ष | भू | षा | नु | या | तः |
| स | र्वं | वि | स्मृ | त्य | दै | वा | त्स्मृ | ति | मु | ष | सि | ग | तां | घो | ष | य | न्यो | घु | सं | ज्ञां |
| प्रा | क्सं | स्का | रे | ण | सं | प्र | त्य | पि | धु | व | ति | शि | रः | प | ट्टि | का | पा | ठ | जे | न |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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