ब्रूमः शङ्खं तव नल यशः श्रेयसे सृष्टशब्दं
यत्सोदर्यं स दिवि लिखितः स्पष्टमस्ति द्विजेन्द्रः ।
अद्धा श्रद्धाकरमिह करच्छेदमप्यस्य पश्य
म्लानिस्थानं तदपि नितरां हारिणो यः कलङ्कः ॥
ब्रूमः शङ्खं तव नल यशः श्रेयसे सृष्टशब्दं
यत्सोदर्यं स दिवि लिखितः स्पष्टमस्ति द्विजेन्द्रः ।
अद्धा श्रद्धाकरमिह करच्छेदमप्यस्य पश्य
म्लानिस्थानं तदपि नितरां हारिणो यः कलङ्कः ॥
यत्सोदर्यं स दिवि लिखितः स्पष्टमस्ति द्विजेन्द्रः ।
अद्धा श्रद्धाकरमिह करच्छेदमप्यस्य पश्य
म्लानिस्थानं तदपि नितरां हारिणो यः कलङ्कः ॥
अन्वयः
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नल, तव यशः श्रेयसे सृष्ट-शब्दम् शङ्खम् ब्रूमः । यत्-सोदर्यः सः द्विज-इन्द्रः दिवि स्पष्टम् लिखितः अस्ति । अद्धा, इह अस्य श्रद्धा-करम् कर-च्छेदम् अपि पश्य । यः कलङ्कः, तत् अपि नितराम् हारिणः म्लानि-स्थानम् (अस्ति) ।
Summary
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O Nala, we declare your fame to be a conch whose sound is created for welfare. Its brother, the moon, is clearly inscribed in the sky. Truly, see here its convincing 'ray-cutting' (the waning phase). The spot on the moon, which is a mark of blemish, is also a place of fading for that exceedingly charming one.
पदच्छेदः
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| ब्रूमः | ब्रूमः (√ब्रू कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | we say |
| शङ्खम् | शङ्ख (२.१) | the conch |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| नल | नल (८.१) | O Nala |
| यशः | यशस् (२.१) | fame |
| श्रेयसे | श्रेयस् (४.१) | for the good of |
| सृष्टशब्दं | सृष्ट–शब्द (२.१) | whose sound is created |
| यत्सोदर्यम् | यद्–सोदर्य (१.१) | whose brother |
| सः | तद् (१.१) | he |
| दिवि | दिव् (७.१) | in the sky |
| लिखितः | लिखित (√लिख्+क्त, १.१) | written |
| स्पष्टम् | स्पष्ट | clearly |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| द्विजेन्द्रः | द्विज–इन्द्र (१.१) | the lord of the twice-born (the moon) |
| अद्धा | अद्धा | truly |
| श्रद्धाकरम् | श्रद्धा–कर (२.१) | causing belief |
| इह | इह | here |
| करच्छेदमपि | कर–छेदम्–अपि (२.१) | even the cutting of its ray |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | see |
| म्लानिस्थानं | म्लानि–स्थान (१.१) | the place of fading |
| तदपि | तद्–अपि | that also |
| नितरां | नितराम् | exceedingly |
| हारिणः | हारिन् (६.१) | of the charming one |
| यः | यद् (१.१) | which |
| कलङ्कः | कलङ्क (१.१) | the spot |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्रू | मः | श | ङ्खं | त | व | न | ल | य | शः | श्रे | य | से | सृ | ष्ट | श | ब्दं |
| य | त्सो | द | र्यं | स | दि | वि | लि | खि | तः | स्प | ष्ट | म | स्ति | द्वि | जे | न्द्रः |
| अ | द्धा | श्र | द्धा | क | र | मि | ह | क | र | च्छे | द | म | प्य | स्य | प | श्य |
| म्ला | नि | स्था | नं | त | द | पि | नि | त | रां | हा | रि | णो | यः | क | ल | ङ्कः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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