सुरपरिवृढः कर्णात्प्रत्यग्रहीत्किल कुण्डल-
द्वयमथ खलु प्राच्यै प्रादान्मुदा स हि तत्पतिः ।
विधुरुदयभागेकं तत्र व्यलोकि विलोक्यते
नवतरकरस्वर्णस्रावि द्वितीयमहर्मणिः ॥
सुरपरिवृढः कर्णात्प्रत्यग्रहीत्किल कुण्डल-
द्वयमथ खलु प्राच्यै प्रादान्मुदा स हि तत्पतिः ।
विधुरुदयभागेकं तत्र व्यलोकि विलोक्यते
नवतरकरस्वर्णस्रावि द्वितीयमहर्मणिः ॥
द्वयमथ खलु प्राच्यै प्रादान्मुदा स हि तत्पतिः ।
विधुरुदयभागेकं तत्र व्यलोकि विलोक्यते
नवतरकरस्वर्णस्रावि द्वितीयमहर्मणिः ॥
अन्वयः
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सुरपरिवृढः कर्णात् कुण्डल-द्वयम् प्रति अग्रहीत् किल । अथ सः तत्-पतिः हि (सन्) मुदा प्राच्यै प्रादात् खलु । तत्र एकम् उदयभाक् विधुः व्यलोकि । द्वितीयम् नवतर-कर-स्वर्ण-स्रावि अहर्मणिः विलोक्यते ।
Summary
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It is said that Indra took back the pair of earrings from Karna. Then, being her husband, he joyfully gave them to the East. Of those, one, the rising moon, was seen before. Now, the second, the sun, dripping gold in the form of fresh rays, is being seen.
पदच्छेदः
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| सुरपरिवृढः | सुर–परिवृढ (१.१) | The lord of the gods (Indra) |
| कर्णात् | कर्ण (५.१) | from Karna |
| प्रति | प्रति | back |
| अग्रहीत् | अग्रहीत् (प्रति√ग्रह् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | took |
| किल | किल | it is said |
| कुण्डलद्वयम् | कुण्डल–द्वय (२.१) | a pair of earrings |
| अथ | अथ | then |
| खलु | खलु | indeed |
| प्राच्यै | प्राची (४.१) | for the eastern direction |
| प्रादात् | प्रादात् (प्र√दा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| मुदा | मुद् (३.१) | with joy |
| सः | तद् (१.१) | he |
| हि | हि | for |
| तत्पतिः | तद्–पति (१.१) | her husband |
| विधुः | विधु (१.१) | the moon |
| उदयभाक् | उदय–भाज् (१.१) | rising |
| एकम् | एक (१.१) | one |
| तत्र | तत्र | of the two |
| व्यलोकि | व्यलोकि (वि√लोक् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| विलोक्यते | विलोक्यते (वि√लोक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is being seen |
| नवतरकरस्वर्णस्रावि | नवतर–कर–स्वर्ण–स्राविन् (१.१) | dripping gold in the form of newer rays |
| द्वितीयम् | द्वितीय (१.१) | the second |
| अहर्मणिः | अहर्मणि (१.१) | the sun |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | र | प | रि | वृ | ढः | क | र्णा | त्प्र | त्य | ग्र | ही | त्कि | ल | कु | ण्ड | ल |
| द्व | य | म | थ | ख | लु | प्रा | च्यै | प्रा | दा | न्मु | दा | स | हि | त | त्प | तिः |
| वि | धु | रु | द | य | भा | गे | कं | त | त्र | व्य | लो | कि | वि | लो | क्य | ते |
| न | व | त | र | क | र | स्व | र्ण | स्रा | वि | द्वि | ती | य | म | ह | र्म | णिः |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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