चुलुकिततमःसिन्धोर्भृङ्गैः करादिव शुभ्यते
नभसि बिसिनीबन्धोरन्ध्रच्युतैरुदविन्दुभिः ।
शतदलमधुस्रोतःकच्छद्वयीपरिरम्भणा-
दनुपदमदःपङ्काशङ्काममी मम तन्वते ॥
चुलुकिततमःसिन्धोर्भृङ्गैः करादिव शुभ्यते
नभसि बिसिनीबन्धोरन्ध्रच्युतैरुदविन्दुभिः ।
शतदलमधुस्रोतःकच्छद्वयीपरिरम्भणा-
दनुपदमदःपङ्काशङ्काममी मम तन्वते ॥
नभसि बिसिनीबन्धोरन्ध्रच्युतैरुदविन्दुभिः ।
शतदलमधुस्रोतःकच्छद्वयीपरिरम्भणा-
दनुपदमदःपङ्काशङ्काममी मम तन्वते ॥
अन्वयः
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नभसि बिसिनीबन्धोः करात् इव रन्ध्रच्युतैः भृङ्गैः चुलुकिततमःसिन्धोः (सतः) उदविन्दुभिः शुभ्यते । अमी (उदविन्दवः) शतदलमधुस्रोतःकच्छद्वयीपरिरम्भणात् अनुपदम् मम अदःपङ्काशङ्कां तन्वते ।
Summary
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The sky, its ocean of darkness sipped up by bees (darkness), is beautified by water drops (stars) fallen from the pores of the sun's rays. As these drops embrace the two banks of the honey-stream from the lotuses, they constantly create in me the suspicion that they are mud (ichor from celestial elephants).
पदच्छेदः
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| चुलुकिततमःसिन्धोः | चुलुकित–तमस्–सिन्धु (६.१) | of the ocean of darkness that has been sipped up |
| भृङ्गैः | भृङ्ग (३.३) | by the bees |
| करात् | कर (५.१) | from the hand (ray) |
| इव | इव | as if |
| शुभ्यते | शुभ्यते (√शुभ् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is beautified |
| नभसि | नभस् (७.१) | in the sky |
| बिसिनीबन्धोः | बिसिनी–बन्धु (६.१) | of the friend of lotuses (the sun) |
| रन्ध्रच्युतैः | रन्ध्र–च्युत (√च्यु+क्त, ३.३) | fallen from the pores |
| उदविन्दुभिः | उद–विन्दु (३.३) | by drops of water |
| शतदलमधुस्रोतःकच्छद्वयीपरिरम्भणात् | शतदल–मधु–स्रोतस्–कच्छ–द्वयी–परिरम्भण (५.१) | from the embrace of the pair of banks of the stream of honey from the lotuses |
| अनुपदम् | अनुपदम् | at every step |
| अदःपङ्काशङ्काम् | अदस्–पङ्क–आशङ्का (२.१) | the suspicion of that mud |
| अमी | अदस् (१.३) | these |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| तन्वते | तन्वते (√तन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they create |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चु | लु | कि | त | त | मः | सि | न्धो | र्भृ | ङ्गैः | क | रा | दि | व | शु | भ्य | ते |
| न | भ | सि | बि | सि | नी | ब | न्धो | र | न्ध्र | च्यु | तै | रु | द | वि | न्दु | भिः |
| श | त | द | ल | म | धु | स्रो | तः | क | च्छ | द्व | यी | प | रि | र | म्भ | णा |
| द | नु | प | द | म | दः | प | ङ्का | श | ङ्का | म | मी | म | म | त | न्व | ते |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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