सरसिजवनान्युद्यत्पक्षार्यमाणि हसन्तु न
क्षतरुचिसुहृच्चन्द्रं तन्द्रामुपैतु न कैरवम् ।
हिमगिरिदृषद्दायादश्रि प्रतीतमदः स्मितं
कुमुदविपिनस्याथो पाथोरुहैर्निजनिद्रया ॥
सरसिजवनान्युद्यत्पक्षार्यमाणि हसन्तु न
क्षतरुचिसुहृच्चन्द्रं तन्द्रामुपैतु न कैरवम् ।
हिमगिरिदृषद्दायादश्रि प्रतीतमदः स्मितं
कुमुदविपिनस्याथो पाथोरुहैर्निजनिद्रया ॥
क्षतरुचिसुहृच्चन्द्रं तन्द्रामुपैतु न कैरवम् ।
हिमगिरिदृषद्दायादश्रि प्रतीतमदः स्मितं
कुमुदविपिनस्याथो पाथोरुहैर्निजनिद्रया ॥
अन्वयः
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उद्यत्-पक्ष-अर्यमाणि सरसिज-वनानि हसन्तु । क्षत-रुचि-सुहृत्-चन्द्रम् कैरवम् तन्द्राम् उपैतु । अथो हिम-गिरि-दृषत्-दायाद-श्रि कुमुद-विपिनस्य स्मितम् निज-निद्रया पाथः-रुहैः प्रतीत-मदः (कृतम्) ।
Summary
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Let the lotus groves, with the rising sun as their ally, laugh (bloom). Let the white water lily, whose friend the moon has lost its luster, become drowsy. And so, the crystal-like smile of the night-lotus forest has its pride shattered by the day-lotuses through their own (feigned) sleep.
पदच्छेदः
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| सरसिज-वनानि | सरसिज–वन (१.३) | The lotus groves |
| उद्यत्-पक्ष-अर्यमाणि | उद्यत् (उद्√इ+शतृ)–पक्ष–अर्यमन् (१.३) | having the rising sun as their ally |
| हसन्तु | हसन्तु (√हस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them laugh |
| न | न | (rhetorical) |
| क्षत-रुचि-सुहृत्-चन्द्रम् | क्षत–रुचि–सुहृद्–चन्द्र (१.१) | whose friend, the moon, has its splendor diminished |
| तन्द्राम् | तन्द्रा (२.१) | drowsiness |
| उपैतु | उपैतु (उप√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it go to |
| न | न | (rhetorical) |
| कैरवम् | कैरव (१.१) | the white water lily |
| हिम-गिरि-दृषत्-दायाद-श्रि | हिम-गिरि–दृषद्–दायाद–श्री (१.१) | having the beauty of Himalayan crystal |
| प्रतीत-मदः | प्रतीत (प्रति√इ+क्त)–मद (१.१) | its pride destroyed |
| स्मितम् | स्मित (१.१) | the smile |
| कुमुद-विपिनस्य | कुमुद–विपिन (६.१) | of the night-lotus forest |
| अथो | अथो | And so |
| पाथः-रुहैः | पाथस्–रुह (३.३) | by the day-lotuses |
| निज-निद्रया | निज–निद्रा (३.१) | by their own sleep |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र | सि | ज | व | ना | न्यु | द्य | त्प | क्षा | र्य | मा | णि | ह | स | न्तु | न |
| क्ष | त | रु | चि | सु | हृ | च्च | न्द्रं | त | न्द्रा | मु | पै | तु | न | कै | र | वम् |
| हि | म | गि | रि | दृ | ष | द्दा | या | द | श्रि | प्र | ती | त | म | दः | स्मि | तं |
| कु | मु | द | वि | पि | न | स्या | थो | पा | थो | रु | है | र्नि | ज | नि | द्र | या |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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