तटतरुखगश्रेणीसांराविणैरिव साम्प्रतं
सरसि विगलन्निद्रामुद्राजनिष्ट सरोजिनी ।
अधरसुधया मध्ये मध्ये वधूमुखलब्धया
धयति मधुपः स्वादुंकारं मधूनि सरोरुहाम् ॥
तटतरुखगश्रेणीसांराविणैरिव साम्प्रतं
सरसि विगलन्निद्रामुद्राजनिष्ट सरोजिनी ।
अधरसुधया मध्ये मध्ये वधूमुखलब्धया
धयति मधुपः स्वादुंकारं मधूनि सरोरुहाम् ॥
सरसि विगलन्निद्रामुद्राजनिष्ट सरोजिनी ।
अधरसुधया मध्ये मध्ये वधूमुखलब्धया
धयति मधुपः स्वादुंकारं मधूनि सरोरुहाम् ॥
अन्वयः
AI
साम्प्रतम् सरसि सरोजिनी तट-तरु-खग-श्रेणी-सांराविणैः इव विगलत्-निद्रा-मुद्रा अजनिष्ट । मधुपः मध्ये मध्ये वधू-मुख-लब्धया अधर-सुधया (मिश्रितानि) सरोरुहाम् मधूनि स्वादुं-कारम् धयति ।
Summary
AI
Now in the lake, the lotus plant has awakened, its seal of sleep broken as if by the chirping of birds on the bank-side trees. The male bee relishingly drinks the honey of the lotuses, mixed with the lip-nectar obtained intermittently from the mouth of his beloved female bee.
पदच्छेदः
AI
| तट-तरु-खग-श्रेणी-सांराविणैः | तट–तरु–खग–श्रेणी–सांराविन् (३.३) | by the collective chirping of the rows of birds on the bank-side trees |
| इव | इव | as if |
| साम्प्रतम् | साम्प्रतम् | Now |
| सरसि | सरस् (७.१) | in the lake |
| विगलत्-निद्रा-मुद्रा | विगलत् (वि√गल्+शतृ)–निद्रा–मुद्रा (१.१) | she whose seal of sleep is breaking away |
| अजनिष्ट | अजनिष्ट (√जन् कर्तरि लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was born |
| सरोजिनी | सरोजिनी (१.१) | the lotus plant |
| अधर-सुधया | अधर–सुधा (३.१) | with the nectar of the lips |
| मध्ये | मध्य (७.१) | in between |
| मध्ये | मध्य (७.१) | in between |
| वधू-मुख-लब्धया | वधू–मुख–लब्ध (√लभ्+क्त, ३.१) | obtained from the face of his beloved |
| धयति | धयति (√धे कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drinks |
| मधुपः | मधुप (१.१) | The bee |
| स्वादुं-कारम् | स्वादुम्–कार | relishingly |
| मधूनि | मधु (२.३) | the honeys |
| सरोरुहाम् | सरोरुह (६.३) | of the lotuses |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | ट | त | रु | ख | ग | श्रे | णी | सां | रा | वि | णै | रि | व | सा | म्प्र | तं |
| स | र | सि | वि | ग | ल | न्नि | द्रा | मु | द्रा | ज | नि | ष्ट | स | रो | जि | नी |
| अ | ध | र | सु | ध | या | म | ध्ये | म | ध्ये | व | धू | मु | ख | ल | ब्ध | या |
| ध | य | ति | म | धु | पः | स्वा | दुं | का | रं | म | धू | नि | स | रो | रु | हाम् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.