प्रथमककुभः पान्थत्वेन स्फुटेक्षितवृत्रहा-
ण्यनुपदमिह द्रक्ष्यन्ति त्वां महांसि महस्पतेः ।
पटिमवहनादूहापोहक्षमाणि वितन्वता-
महह युवयोस्तावल्लक्ष्मीविवेचनचातुरीम् ॥
प्रथमककुभः पान्थत्वेन स्फुटेक्षितवृत्रहा-
ण्यनुपदमिह द्रक्ष्यन्ति त्वां महांसि महस्पतेः ।
पटिमवहनादूहापोहक्षमाणि वितन्वता-
महह युवयोस्तावल्लक्ष्मीविवेचनचातुरीम् ॥
ण्यनुपदमिह द्रक्ष्यन्ति त्वां महांसि महस्पतेः ।
पटिमवहनादूहापोहक्षमाणि वितन्वता-
महह युवयोस्तावल्लक्ष्मीविवेचनचातुरीम् ॥
अन्वयः
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इह प्रथम-ककुभः पान्थत्वेन स्फुट-ईक्षित-वृत्रहाणि महः-पतेः महांसि अनुपदम् त्वाम् द्रक्ष्यन्ति । अहह, पटिम-वहनात् ऊह-अपोह-क्षमाणि (तानि) युवयोः लक्ष्मी-विवेचन-चातुरीम् तावत् वितन्वताम् ।
Summary
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The splendors of the Sun, traveling from the East where Indra is clearly seen, will soon see you here. Ah, let those lights, capable of reasoning due to their sharpness, display for a while their skill in distinguishing the beauty of you two (Nala and Damayanti).
पदच्छेदः
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| प्रथम-ककुभः | प्रथम–ककुभ् (६.१) | of the first direction (East) |
| पान्थत्वेन | पान्थत्व (३.१) | as travelers |
| स्फुट-ईक्षित-वृत्रहाणि | स्फुट–ईक्षित (√ईक्ष्+क्त)–वृत्रहन् (१.३) | where Vṛtrahan (Indra) is clearly seen |
| अनुपदम् | अनुपदम् | immediately after |
| इह | इह | here |
| द्रक्ष्यन्ति | द्रक्ष्यन्ति (√दृश् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | will see |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| महांसि | महस् (१.३) | the splendors |
| महः-पतेः | महस्–पति (६.१) | of the lord of light (the Sun) |
| पटिम-वहनात् | पटिमन्–वहन (५.१) | from possessing sharpness |
| ऊह-अपोह-क्षमाणि | ऊह–अपोह–क्षम (१.३) | capable of reasoning and concluding |
| वितन्वताम् | वितन्वताम् (वि√तन् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them display |
| अहह | अहह | Ah |
| युवयोः | युष्मद् (६.२) | of you two |
| तावत् | तावत् | for a while |
| लक्ष्मी-विवेचन-चातुरीम् | लक्ष्मी–विवेचन–चातुरी (२.१) | the skill in distinguishing the beauty |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | थ | म | क | कु | भः | पा | न्थ | त्वे | न | स्फु | टे | क्षि | त | वृ | त्र | हा |
| ण्य | नु | प | द | मि | ह | द्र | क्ष्य | न्ति | त्वां | म | हां | सि | म | ह | स्प | तेः |
| प | टि | म | व | ह | ना | दू | हा | पो | ह | क्ष | मा | णि | वि | त | न्व | ता |
| म | ह | ह | यु | व | यो | स्ता | व | ल्ल | क्ष्मी | वि | वे | च | न | चा | तु | रीम् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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