मुषितमनसश्चित्रं भैमि त्वयाद्य कलागृहै-
र्निषधवसुधानाथस्यापि श्लथश्लथता विधौ ।
अजगणदयं संध्यां वन्ध्यां विधाय न दूषणं
नमसितुमना यन्नाम स्यान्न संप्रति पूषणम् ॥
मुषितमनसश्चित्रं भैमि त्वयाद्य कलागृहै-
र्निषधवसुधानाथस्यापि श्लथश्लथता विधौ ।
अजगणदयं संध्यां वन्ध्यां विधाय न दूषणं
नमसितुमना यन्नाम स्यान्न संप्रति पूषणम् ॥
र्निषधवसुधानाथस्यापि श्लथश्लथता विधौ ।
अजगणदयं संध्यां वन्ध्यां विधाय न दूषणं
नमसितुमना यन्नाम स्यान्न संप्रति पूषणम् ॥
अन्वयः
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भैमि, अद्य त्वया कला-गृहैः मुषित-मनसः निषध-वसुधा-नाथस्य अपि विधौ श्लथ-श्लथता (अस्ति इति) चित्रम् । अयम् संध्याम् वन्ध्याम् विधाय दूषणम् न अजगणत्, यत् नाम संप्रति पूषणम् नमसितु-मनाः न स्यात् ।
Summary
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O Bhaimi, it is strange that today, because of you and these pleasure-pavilions, even the lord of Nishadha, his mind stolen, shows extreme laxity in his duties. He made his evening prayer fruitless and did not consider it a fault, because indeed he is not now inclined to worship the Sun.
पदच्छेदः
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| मुषित-मनसः | मुषित (√मुष्+क्त)–मनस् (६.१) | of him whose mind is stolen |
| चित्रम् | चित्र (१.१) | It is strange |
| भैमि | भैमी (८.१) | O Bhaimi |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अद्य | अद्य | today |
| कला-गृहैः | कला–गृह (३.३) | by the pleasure-pavilions |
| निषध-वसुधा-नाथस्य | निषध–वसुधा–नाथ (६.१) | of the lord of the Nishadha land |
| अपि | अपि | even |
| श्लथ-श्लथता | श्लथ–श्लथता (१.१) | extreme laxity |
| विधौ | विधि (७.१) | in his duty |
| अजगणत् | अजगणत् (√गण् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he regarded |
| अयम् | इदम् (१.१) | He |
| संध्याम् | संध्या (२.१) | the evening prayer |
| वन्ध्याम् | वन्ध्या (२.१) | fruitless |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| न | न | not |
| दूषणम् | दूषण (२.१) | a fault |
| नमसितु-मनाः | नमसितुम् (√नम्+तुमुन्)–मनस् (१.१) | having a mind to worship |
| यत् | यत् | because |
| नाम | नाम | indeed |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he may be |
| न | न | not |
| संप्रति | संप्रति | now |
| पूषणम् | पूषन् (२.१) | the Sun |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | षि | त | म | न | स | श्चि | त्रं | भै | मि | त्व | या | द्य | क | ला | गृ | है |
| र्नि | ष | ध | व | सु | धा | ना | थ | स्या | पि | श्ल | थ | श्ल | थ | ता | वि | धौ |
| अ | ज | ग | ण | द | यं | सं | ध्यां | व | न्ध्यां | वि | धा | य | न | दू | ष | णं |
| न | म | सि | तु | म | ना | य | न्ना | म | स्या | न्न | सं | प्र | ति | पू | ष | णम् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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