भव लघुयुताकान्तः संध्यामुपास्स्व तपोमल
त्वरयति कथं संध्येयं त्वां न नाम निशानुजा ।
द्युतिपतिरथावश्यंकारी दिनोदयमासिता
हरिपतिहरित्पूर्णभ्रूणायिता कियतः क्षनान् ॥
भव लघुयुताकान्तः संध्यामुपास्स्व तपोमल
त्वरयति कथं संध्येयं त्वां न नाम निशानुजा ।
द्युतिपतिरथावश्यंकारी दिनोदयमासिता
हरिपतिहरित्पूर्णभ्रूणायिता कियतः क्षनान् ॥
त्वरयति कथं संध्येयं त्वां न नाम निशानुजा ।
द्युतिपतिरथावश्यंकारी दिनोदयमासिता
हरिपतिहरित्पूर्णभ्रूणायिता कियतः क्षनान् ॥
अन्वयः
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तपः-मल, लघु भव । संध्याम् उपास्स्व । निशा-अनुजा इयम् संध्या नाम त्वाम् कथम् न त्वरयति? अथ द्युति-पतिः अवश्यम्-कारी (सन्) दिन-उदयम् आसिता । हरि-पति-हरित्-पूर्ण-भ्रूणायिता (सा) कियतः क्षनान् (आसिता)?
Summary
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O you, sullied by the penance of separation, be quick and perform the evening worship. How does this evening, the younger sister of night, not hasten you? Moreover, the Sun, who must perform his duty, will bring the sunrise. The East, appearing like a full embryo, will only last for a few moments.
पदच्छेदः
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| भव | भव (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be |
| लघु-युता-कान्तः | लघु–युत (√यु+क्त)–कान्ता (८.१) | O beloved, be quick |
| संध्याम् | संध्या (२.१) | the evening prayer |
| उपास्स्व | उपास्स्व (उप√आस् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | perform |
| तपः-मल | तपस्–मला (८.१) | O you who are sullied by penance |
| त्वरयति | त्वरयति (√त्वर् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | hastens |
| कथम् | कथम् | How |
| संध्या | संध्या (१.१) | evening |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| न | न | not |
| नाम | नाम | indeed |
| निशा-अनुजा | निशा–अनुजा (१.१) | the younger sister of the night |
| द्युति-पतिः | द्युति–पति (१.१) | The lord of light (the Sun) |
| अथ | अथ | moreover |
| अवश्यम्-कारी | अवश्यम्–कारिन् (१.१) | who must do his duty |
| दिन-उदयम् | दिन–उदय (२.१) | the sunrise |
| आसिता | आसिता (√आस् कर्तरि लुट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will bring |
| हरि-पति-हरित्-पूर्ण-भ्रूणायिता | हरि-पति–हरित्–पूर्ण–भ्रूणायिता (√भ्रूण+क्यच्+क्त+टाप्, १.१) | becoming like a full embryo in the direction of Indra (the East) |
| कियतः | कियत् (६.१) | for a few |
| क्षनान् | क्षण (२.३) | moments |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व | ल | घु | यु | ता | का | न्तः | सं | ध्या | मु | पा | स्स्व | त | पो | म | ल |
| त्व | र | य | ति | क | थं | सं | ध्ये | यं | त्वां | न | ना | म | नि | शा | नु | जा |
| द्यु | ति | प | ति | र | था | व | श्यं | का | री | दि | नो | द | य | मा | सि | ता |
| ह | रि | प | ति | ह | रि | त्पू | र्ण | भ्रू | णा | यि | ता | कि | य | तः | क्ष | नान् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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