असुरहितमप्यादित्योत्थां विपत्तिमुपागतं
दितिसुतगुरुः प्राणैर्योक्तुं न किं कचवत्तमः ।
पठति लुठतीं कण्ठे विद्यामयं मृतजीवनीं
यदि न वहते संध्यामौनव्रतव्ययभीरुताम् ॥
असुरहितमप्यादित्योत्थां विपत्तिमुपागतं
दितिसुतगुरुः प्राणैर्योक्तुं न किं कचवत्तमः ।
पठति लुठतीं कण्ठे विद्यामयं मृतजीवनीं
यदि न वहते संध्यामौनव्रतव्ययभीरुताम् ॥
दितिसुतगुरुः प्राणैर्योक्तुं न किं कचवत्तमः ।
पठति लुठतीं कण्ठे विद्यामयं मृतजीवनीं
यदि न वहते संध्यामौनव्रतव्ययभीरुताम् ॥
अन्वयः
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दिति-सुत-गुरुः (शुक्रः) असुरहितम् अपि आदित्य-उत्थाम् विपत्तिम् उपागतम् तमः कचवत् प्राणैः योक्तुम् किम् न (शक्नोति)? यदि अयम् संध्या-मौन-व्रत-व्यय-भीरुताम् न वहते, (तर्हि) कण्ठे लुठतीम् मृत-जीवनीम् विद्याम् पठति।
Summary
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Why can't Shukracharya, the preceptor of demons, revive the darkness—which, though a demon, has met its demise from the sun—just as he revived Kacha? He could, if he were not afraid of breaking his vow of silence at twilight. Otherwise, he would recite the life-restoring science that is ready on his tongue.
पदच्छेदः
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| असुरहितम् | असु–रहित (२.१) | devoid of life-breath |
| अपि | अपि | though |
| आदित्योत्थाम् | आदित्य–उत्था (२.१) | arisen from the sun |
| विपत्तिम् | विपत्ति (२.१) | calamity |
| उपागतम् | उपागत (उप+आ√गम्+क्त, २.१) | having met |
| दितिसुतगुरुः | दिति–सुत–गुरु (१.१) | the preceptor of the demons (Shukra) |
| प्राणैः | प्राण (३.३) | with life |
| योक्तुम् | योक्तुम् (√युज्+तुमुन्) | to join |
| न | न | not |
| किम् | किम् | why |
| कचवत् | कचवत् | like Kacha |
| तमः | तमस् (२.१) | the darkness |
| पठति | पठति (√पठ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he would recite |
| लुठतीम् | लुठन्ती (√लुठ्+शतृ+ङीप्, २.१) | rolling |
| कण्ठे | कण्ठ (७.१) | on his throat |
| विद्याम् | विद्या (२.१) | the science |
| अयम् | इदम् (१.१) | he |
| मृतजीवनीम् | मृत–जीवनी (२.१) | life-restoring |
| यदि | यदि | if |
| न | न | not |
| वहते | वहते (√वह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he possessed |
| संध्यामौनव्रतव्ययभीरुताम् | संध्या–मौन–व्रत–व्यय–भीरुता (२.१) | the fear of breaking the vow of silence at twilight |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सु | र | हि | त | म | प्या | दि | त्यो | त्थां | वि | प | त्ति | मु | पा | ग | तं |
| दि | ति | सु | त | गु | रुः | प्रा | णै | र्यो | क्तुं | न | किं | क | च | व | त्त | मः |
| प | ठ | ति | लु | ठ | तीं | क | ण्ठे | वि | द्या | म | यं | मृ | त | जी | व | नीं |
| य | दि | न | व | ह | ते | सं | ध्या | मौ | न | व्र | त | व्य | य | भी | रु | ताम् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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