सा शशाक परिरम्भदायिनी
गाहितुं बृहदुरः प्रियस्य न ।
चक्षमे च स न भङ्गुरभ्रुव-
स्तुङ्गपीनकुचदूरतां गतम् ॥
सा शशाक परिरम्भदायिनी
गाहितुं बृहदुरः प्रियस्य न ।
चक्षमे च स न भङ्गुरभ्रुव-
स्तुङ्गपीनकुचदूरतां गतम् ॥
गाहितुं बृहदुरः प्रियस्य न ।
चक्षमे च स न भङ्गुरभ्रुव-
स्तुङ्गपीनकुचदूरतां गतम् ॥
अन्वयः
AI
परिरम्भ-दायिनी सा प्रियस्य बृहत्-उरः गाहितुम् न शशाक। च सः भङ्गुर-भ्रुवः तुङ्ग-पीन-कुच-दूरताम् गतम् न चक्षमे।
Summary
AI
While embracing him, she was unable to fully encompass her beloved's broad chest. And he, in turn, could not tolerate the distance between them created by her high, plump breasts.
पदच्छेदः
AI
| सा | तद् (१.१) | she |
| शशाक | शशाक (√शक् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was able |
| परिरम्भदायिनी | परिरम्भ–दायिन् (१.१) | while giving an embrace |
| गाहितुं | गाहितुम् (√गाह्+तुमुन्) | to encompass |
| बृहदुरः | बृहत्–उरस् (२.१) | the broad chest |
| प्रियस्य | प्रिय (६.१) | of her beloved |
| न | न | not |
| चक्षमे | चक्षमे (√क्षम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he tolerated |
| च | च | and |
| स | तद् (१.१) | he |
| न | न | not |
| भङ्गुरभ्रुवः | भङ्गुर–भ्रू (६.१) | of her with curved eyebrows |
| तुङ्गपीनकुचदूरतां | तुङ्ग–पीन–कुच–दूरता (२.१) | the distance caused by her high, plump breasts |
| गतम् | गत (√गम्+क्त, २.१) | the state of being |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | श | शा | क | प | रि | र | म्भ | दा | यि | नी |
| गा | हि | तुं | बृ | ह | दु | रः | प्रि | य | स्य | न |
| च | क्ष | मे | च | स | न | भ | ङ्गु | र | भ्रु | व |
| स्तु | ङ्ग | पी | न | कु | च | दू | र | तां | ग | तम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.