यद्भ्रुवौ कुटिलिते तया रते
मन्मथेन तदनामि कार्मुकम् ।
यत्तु हुंहुमिति सा तदा व्यधा-
त्तत्स्मरस्य शरमुक्तिहुंकृतम् ॥
यद्भ्रुवौ कुटिलिते तया रते
मन्मथेन तदनामि कार्मुकम् ।
यत्तु हुंहुमिति सा तदा व्यधा-
त्तत्स्मरस्य शरमुक्तिहुंकृतम् ॥
मन्मथेन तदनामि कार्मुकम् ।
यत्तु हुंहुमिति सा तदा व्यधा-
त्तत्स्मरस्य शरमुक्तिहुंकृतम् ॥
अन्वयः
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रते तया यत् भ्रुवौ कुटिलिते, तत् मन्मथेन कार्मुकम् अनामि। तु तदा सा यत् 'हुम् हुम्' इति व्यधात्, तत् स्मरस्य शर-मुक्ति-हुंकृतम् (आसीत्)।
Summary
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During their love-making, when she bent her eyebrows, it was as if Kamadeva was bending his bow. And when she made the "hum hum" sound, that was the roar of Kamadeva releasing his arrows.
पदच्छेदः
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| यत् | यद् (२.१) | which |
| भ्रुवौ | भ्रू (२.२) | two eyebrows |
| कुटिलिते | कुटिलित (२.२) | were bent |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| रते | रत (७.१) | during love-making |
| मन्मथेन | मन्मथ (३.१) | by Kamadeva |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अनामि | अनामि (√नम् +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was bent |
| कार्मुकम् | कार्मुक (१.१) | bow |
| यत् | यद् (२.१) | which |
| तु | तु | but |
| हुंहुम् | हुम्–हुम् | (sound) |
| इति | इति | thus |
| सा | तद् (१.१) | she |
| तदा | तदा | then |
| व्यधात् | व्यधात् (वि√धा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| स्मरस्य | स्मर (६.१) | of Kamadeva |
| शरमुक्तिहुंकृतम् | शर–मुक्ति–हुंकृत (१.१) | the roar of releasing the arrow |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्भ्रु | वौ | कु | टि | लि | ते | त | या | र | ते |
| म | न्म | थे | न | त | द | ना | मि | का | र्मु | कम् |
| य | त्तु | हुं | हु | मि | ति | सा | त | दा | व्य | धा |
| त्त | त्स्म | र | स्य | श | र | मु | क्ति | हुं | कृ | तम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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