कान्तमूर्ध्नि ददती पिधित्सया
तन्मणेः श्रवणपूरमुत्पलम् ।
रन्तुमर्चनमिवाचरत्पुरः
सा स्ववल्लभतनोर्मनोभुवः ॥
कान्तमूर्ध्नि ददती पिधित्सया
तन्मणेः श्रवणपूरमुत्पलम् ।
रन्तुमर्चनमिवाचरत्पुरः
सा स्ववल्लभतनोर्मनोभुवः ॥
तन्मणेः श्रवणपूरमुत्पलम् ।
रन्तुमर्चनमिवाचरत्पुरः
सा स्ववल्लभतनोर्मनोभुवः ॥
अन्वयः
AI
सा पिधित्सया तत्-मणेः श्रवण-पूरम् उत्पलम् कान्त-मूर्ध्नि ददती, पुरः रन्तुम् स्व-वल्लभ-तनोः मनोभुवः अर्चनम् इव आचरत्।
Summary
AI
With the desire to cover the jewel on her beloved's head, she placed her lotus ear-ornament on it. By doing so, it seemed as if she were performing a worship of Kamadeva, embodied in her beloved, before beginning their love-play.
पदच्छेदः
AI
| कान्तमूर्ध्नि | कान्त–मूर्धन् (७.१) | on her beloved's head |
| ददती | ददत् (√दा+शतृ, १.१) | placing |
| पिधित्सया | पिधित्सा (√धा+सन्+अ+टाप्, ३.१) | with the desire to cover |
| तन्मणेः | तत्–मणि (६.१) | of that jewel |
| श्रवणपूरम् | श्रवण–पूर (२.१) | the ear-ornament |
| उत्पलम् | उत्पल (२.१) | lotus |
| रन्तुम् | रन्तुम् (√रम्+तुमुन्) | to sport |
| अर्चनम् | अर्चन (२.१) | worship |
| इव | इव | as if |
| आचरत् | आचरत् (आ√चर् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she performed |
| पुरः | पुरस् | before |
| सा | तद् (१.१) | she |
| स्ववल्लभतनोः | स्व–वल्लभ–तनु (६.१) | of her own beloved's body |
| मनोभुवः | मनोभु (६.१) | of Kamadeva |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | न्त | मू | र्ध्नि | द | द | ती | पि | धि | त्स | या |
| त | न्म | णेः | श्र | व | ण | पू | र | मु | त्प | लम् |
| र | न्तु | म | र्च | न | मि | वा | च | र | त्पु | रः |
| सा | स्व | व | ल्ल | भ | त | नो | र्म | नो | भु | वः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.