पत्युरागिरिशमातरु क्रमा-
त्स्वस्य चागिरिजमालतं वपुः ।
तस्य चार्हमखिलं पतिव्रता
क्रीडति स्म तप्सा विधाय सा ॥
पत्युरागिरिशमातरु क्रमा-
त्स्वस्य चागिरिजमालतं वपुः ।
तस्य चार्हमखिलं पतिव्रता
क्रीडति स्म तप्सा विधाय सा ॥
त्स्वस्य चागिरिजमालतं वपुः ।
तस्य चार्हमखिलं पतिव्रता
क्रीडति स्म तप्सा विधाय सा ॥
अन्वयः
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सा पतिव्रता क्रमात् पत्युः रागम् आ-गिरिशम् आतनोत्, च स्वस्य वपुः आ-गिरिजम् आलताम् (आतनोत्)। च तपसा अखिलम् तस्य अर्हम् विधाय क्रीडति स्म।
Summary
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That devoted wife gradually expanded her husband's love to the level of Shiva's, and her own body's beauty to that of Parvati. And making everything suitable for him through the penance of their love-play, she sported with him.
पदच्छेदः
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| पत्युः | पति (६.१) | of her husband |
| रागम् | राग (२.१) | love |
| आगिरिशम् | आगिरिशम् | up to the level of Shiva |
| आतनोत् | आतनोत् (आ√तन् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she expanded |
| क्रमात् | क्रमात् | gradually |
| स्वस्य | स्व (६.१) | her own |
| च | च | and |
| आगिरिजम् | आगिरिजम् | up to the level of Parvati |
| आलताम् | आलता (२.१) | the state of being adorned |
| वपुः | वपुस् (२.१) | body |
| तस्य | तद् (६.१) | for him |
| च | च | and |
| अर्हम् | अर्ह (२.१) | worthy |
| अखिलं | अखिल (२.१) | all |
| पतिव्रता | पतिव्रता (१.१) | the devoted wife |
| क्रीडति | क्रीडति (√क्रीड् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | plays |
| स्म | स्म | (past tense marker) |
| तपसा | तपस् (३.१) | with penance |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| सा | तद् (१.१) | she |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | त्यु | रा | गि | रि | श | मा | त | रु | क्र | मा |
| त्स्व | स्य | चा | गि | रि | ज | मा | ल | तं | व | पुः |
| त | स्य | चा | र्ह | म | खि | लं | प | ति | व्र | ता |
| क्री | ड | ति | स्म | त | प्सा | वि | धा | य | सा | |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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