याचनान्न ददतीं नखक्षतं
तां विधाय कथयाऽन्यचेतसम् ।
वक्षसि न्यसितुमात्ततत्करः
स्वं विभिद्य मुमुदे स तन्नखैः ॥
याचनान्न ददतीं नखक्षतं
तां विधाय कथयाऽन्यचेतसम् ।
वक्षसि न्यसितुमात्ततत्करः
स्वं विभिद्य मुमुदे स तन्नखैः ॥
तां विधाय कथयाऽन्यचेतसम् ।
वक्षसि न्यसितुमात्ततत्करः
स्वं विभिद्य मुमुदे स तन्नखैः ॥
अन्वयः
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याचनात् नख-क्षतम् न ददतीम् ताम् कथया अन्य-चेतसम् विधाय, (तस्याः) वक्षसि न्यसितुम् आत्त-तत्-करः सः तत्-नखैः स्वम् विभिद्य मुमुदे।
Summary
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When she wouldn't grant him a nail-mark upon his request, he distracted her with conversation. Then, taking her hand, he instead scratched his own chest with her nails and rejoiced.
पदच्छेदः
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| याचनात् | याचना (५.१) | upon request |
| न | न | not |
| ददतीम् | ददती (√दा+शतृ, २.१) | giving |
| नखक्षतम् | नख–क्षत (२.१) | a nail-mark |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| कथया | कथा (३.१) | with talk |
| अन्यचेतसम् | अन्य–चेतस् (२.१) | distracted |
| वक्षसि | वक्षस् (७.१) | on the chest |
| न्यसितुम् | न्यसितुम् (नि√अस्+तुमुन्) | to place |
| आत्ततत्करः | आत्त–तद्–कर (१.१) | having taken her hand |
| स्वम् | स्व (२.१) | his own (chest) |
| विभिद्य | विभिद्य (वि√भिद्+ल्यप्) | having scratched |
| मुमुदे | मुमुदे (√मुद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | rejoiced |
| सः | तद् (१.१) | he |
| तन्नखैः | तद्–नख (३.३) | with her nails |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | च | ना | न्न | द | द | तीं | न | ख | क्ष | तं |
| तां | वि | धा | य | क | थ | या | ऽन्य | चे | त | सम् |
| व | क्ष | सि | न्य | सि | तु | मा | त्त | त | त्क | रः |
| स्वं | वि | भि | द्य | मु | मु | दे | स | त | न्न | खैः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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