बाहुवक्त्रजघनस्तनाङ्घ्रित-
द्बन्धगन्धरतसंगतानतीः ।
इच्छुरुत्सुकजने दिनेस्मिते
वीक्षिते ति समकेति तेन सा ॥
बाहुवक्त्रजघनस्तनाङ्घ्रित-
द्बन्धगन्धरतसंगतानतीः ।
इच्छुरुत्सुकजने दिनेस्मिते
वीक्षिते ति समकेति तेन सा ॥
द्बन्धगन्धरतसंगतानतीः ।
इच्छुरुत्सुकजने दिनेस्मिते
वीक्षिते ति समकेति तेन सा ॥
अन्वयः
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उत्सुक-जने दिने, इच्छुः तेन, सा स्मिते वीक्षिते (सति), बाहु-वक्त्र-जघन-स्तन-अङ्घ्रि-तत्-बन्ध-गन्ध-रत-संगत-अनतीः इति समकेति।
Summary
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When the eager master, Nala, was desirous, he made her agree to his various requests for love-play involving her arms, face, hips, breasts, and feet, and their fragrant contact, simply with a smile and a glance.
पदच्छेदः
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| बाहुवक्त्रजघनस्तनाङ्घ्रितद्बन्धगन्धरतसंगतानतीः | बाहु–वक्त्र–जघन–स्तन–अङ्घ्रि–तद्–बन्ध–गन्ध–रत–संगत–अनति (२.३) | requests related to love-play involving arms, face, hips, breasts, feet and their fragrant contact |
| इच्छुः | इच्छु (१.१) | desirous |
| उत्सुकजने | उत्सुक–जन (७.१) | when the person (Nala) was eager |
| दिने | दिन (७.१) | (here) master |
| स्मिते | स्मित (√स्मि+क्त, ७.१) | with a smile |
| वीक्षिते | वीक्षित (वि√ईक्ष्+क्त, ७.१) | with a glance |
| इति | इति | thus |
| समकेति | समकेति (सम्√कित् +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made to agree |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| सा | तद् (१.१) | she |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बा | हु | व | क्त्र | ज | घ | न | स्त | ना | ङ्घ्रि | त |
| द्ब | न्ध | ग | न्ध | र | त | सं | ग | ता | न | तीः |
| इ | च्छु | रु | त्सु | क | ज | ने | दि | ने | स्मि | ते |
| वी | क्षि | ते | ति | स | म | के | ति | ते | न | सा |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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