चुम्बनादिषु बभूव नाम किं
तद्वृथा भियमिहापि मा कृथाः ।
इत्युदीर्य रसनावलिव्ययं
निर्ममे मृगदृशोऽयमादिमम् ॥
चुम्बनादिषु बभूव नाम किं
तद्वृथा भियमिहापि मा कृथाः ।
इत्युदीर्य रसनावलिव्ययं
निर्ममे मृगदृशोऽयमादिमम् ॥
तद्वृथा भियमिहापि मा कृथाः ।
इत्युदीर्य रसनावलिव्ययं
निर्ममे मृगदृशोऽयमादिमम् ॥
अन्वयः
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'चुम्बनादिषु किम् नाम बभूव? तत् इह अपि वृथा भयम् मा कृथाः।' इति उदीर्य, अयम् मृगदृशः आदिमम् रसना-आवलि-व्ययम् निर्ममे।
Summary
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"What harm happened in kissing and the like? Therefore, do not be needlessly afraid in this matter either." Having said this, he performed the first act of untying the girdle of the deer-eyed Damayanti.
पदच्छेदः
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| चुम्बनादिषु | चुम्बन–आदि (७.३) | in kissing and the like |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | happened |
| नाम | नाम | indeed |
| किम् | किम् | what |
| तत् | तत् | therefore |
| वृथा | वृथा | in vain |
| भयम् | भय (२.१) | fear |
| इह | इह | here |
| अपि | अपि | also |
| मा | मा | do not |
| कृथाः | कृथाः (√कृ कर्तरि लुङ् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do/have |
| इति | इति | thus |
| उदीर्य | उदीर्य (उद्√ईर्+ल्यप्) | having said |
| रसनावलिव्ययम् | रसना–आवलि–व्यय (२.१) | the act of untying the girdle |
| निर्ममे | निर्ममे (निर्√मा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | performed |
| मृगदृशः | मृगदृश् (६.१) | of the deer-eyed one |
| अयम् | इदम् (१.१) | he |
| आदिमम् | आदिम (२.१) | the first |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चु | म्ब | ना | दि | षु | ब | भू | व | ना | म | किं |
| त | द्वृ | था | भि | य | मि | हा | पि | मा | कृ | थाः |
| इ | त्यु | दी | र्य | र | स | ना | व | लि | व्य | यं |
| नि | र्म | मे | मृ | ग | दृ | शो | ऽय | मा | दि | मम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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