अन्वयः
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'अधुना पीत-तावक-मुख-आसवः एषः भृत्यः निज-कृत्यम् अर्हति। तत् भवत्-ऊरुम् करोमि।' इति असौ तत्र पाणि-पल्लवम् संन्यधात्।
Summary
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"Now, having drunk the nectar of your mouth, this servant deserves his reward. Therefore, I shall take your thigh." Saying this, he placed his tender, sprout-like hand there.
पदच्छेदः
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| पीततावकमुखासवः | पीत (√पा+क्त)–तावक–मुख–आसव (१.१) | one who has drunk the nectar of your mouth |
| अधुना | अधुना | now |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| निजकृत्यम् | निज–कृत्य (२.१) | his own duty/reward |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | deserves |
| तत् | तत् | therefore |
| करोमि | करोमि (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I do/take |
| भवदूरुम् | भवत्–ऊरु (२.१) | your thigh |
| इति | इति | thus |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| तत्र | तत्र | there |
| संन्यधित | संन्यधात् (सम्+नि√धा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | placed |
| पाणिपल्लवम् | पाणि–पल्लव (२.१) | sprout-like hand |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पी | त | ता | व | क | मु | खा | स | वो | ऽधु | ना |
| भृ | त्य | ए | ष | नि | ज | कृ | त्य | म | र्ह | ति |
| त | त्क | रो | मि | भ | व | दू | रु | मि | त्य | सौ |
| त | त्र | सं | न्य | धि | त | पा | णि | प | ल्ल | वम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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