यद्विधूय दयितार्पितं करं
दोर्द्वयेन पिदधे कुचौ दृढम् ।
पार्श्वगं प्रियमपास्य सा ह्रिया
तं हृदिस्थितमिवालिलङ्ग तत् ॥
यद्विधूय दयितार्पितं करं
दोर्द्वयेन पिदधे कुचौ दृढम् ।
पार्श्वगं प्रियमपास्य सा ह्रिया
तं हृदिस्थितमिवालिलङ्ग तत् ॥
दोर्द्वयेन पिदधे कुचौ दृढम् ।
पार्श्वगं प्रियमपास्य सा ह्रिया
तं हृदिस्थितमिवालिलङ्ग तत् ॥
अन्वयः
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यत् सा दयित-अर्पितं करं विघूय, दोर्द्वयेन कुचौ दृढम् पिदधे, तत् ह्रिया पार्श्वगं प्रियम् अपास्य, हृदिस्थितम् तम् आलिलिङ्ग इव।
Summary
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Shaking off her beloved's offered hand, she firmly covered her breasts with both her arms. It was as if, out of shyness, she was pushing away the Nala beside her, only to embrace the Nala who resided within her heart.
पदच्छेदः
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| यत् | यद् | since |
| विघूय | विघूय (वि√धू+ल्यप्) | shaking off |
| दयितार्पितम् | दयित–अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त, २.१) | offered by the beloved |
| करम् | कर (२.१) | hand |
| दोर्द्वयेन | दोस्–द्वय (३.१) | with both arms |
| पिदधे | पिदधे (अपि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | covered |
| कुचौ | कुच (२.२) | breasts |
| दृढम् | दृढम् | firmly |
| पार्श्वगम् | पार्श्व–गम् (२.१) | the one beside her |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | beloved |
| अपास्य | अपास्य (अप√अस्+ल्यप्) | pushing away |
| सा | तद् (१.१) | she |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | out of shyness |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| हृदिस्थितम् | हृदि–स्थित (√स्था+क्त, २.१) | the one situated in her heart |
| इव | इव | as if |
| आलिलिङ्ग | आलिलिङ्ग (आ√लिङ्ग् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | embraced |
| तत् | तत् | therefore |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्वि | धू | य | द | यि | ता | र्पि | तं | क | रं |
| दो | र्द्व | ये | न | पि | द | धे | कु | चौ | दृ | ढम् |
| पा | र्श्व | गं | प्रि | य | म | पा | स्य | सा | ह्रि | या |
| तं | हृ | दि | स्थि | त | मि | वा | लि | ल | ङ्ग | तत् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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