नाऽनया पतिरनायि नेत्रयो-
र्लक्ष्यतामपि परोक्षतामपि ।
वीक्ष्यते स खलु यद्विलोकने
तत्र तत्र नयते ददानया ॥
नाऽनया पतिरनायि नेत्रयो-
र्लक्ष्यतामपि परोक्षतामपि ।
वीक्ष्यते स खलु यद्विलोकने
तत्र तत्र नयते ददानया ॥
र्लक्ष्यतामपि परोक्षतामपि ।
वीक्ष्यते स खलु यद्विलोकने
तत्र तत्र नयते ददानया ॥
अन्वयः
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अनया पतिः नेत्रयोः लक्ष्यताम् अपि न अनायि, परोक्षताम् अपि न अनायि । खलु सः यत्-विलोकने वीक्ष्यते, (अतः) तत्र तत्र नयने ददानया (अनया सः दृष्टः) ।
Summary
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By her, her husband was brought neither into direct sight nor out of sight. Indeed, he is seen in the very act of looking at something; therefore, by casting her eyes here and there (at other objects), she managed to see him.
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| अनया | इदम् (३.१) | by her |
| पतिः | पति (१.१) | the husband |
| अनायि | अनायि (√नी भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was brought |
| नेत्रयोः | नेत्र (६.२) | of the two eyes |
| लक्ष्यताम् | लक्ष्यता (२.१) | to the state of being visible |
| अपि | अपि | even |
| परोक्षताम् | परोक्षता (२.१) | to the state of being out of sight |
| अपि | अपि | also |
| वीक्ष्यते | वीक्ष्यते (वि√ईक्ष् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is seen |
| सः | तद् (१.१) | he |
| खलु | खलु | indeed |
| यद्विलोकने | यद्–विलोकन (७.१) | in the seeing of which (object) |
| तत्र | तत्र | there |
| तत्र | तत्र | and there |
| नयने | नयन (२.२) | the two eyes |
| ददानया | ददाना (√दा+शानच्, ३.१) | by her giving/casting |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | ऽन | या | प | ति | र | ना | यि | ने | त्र | यो |
| र्ल | क्ष्य | ता | म | पि | प | रो | क्ष | ता | म | पि |
| वी | क्ष्य | ते | स | ख | लु | य | द्वि | लो | क | ने |
| त | त्र | त | त्र | न | य | ते | द | दा | न | या |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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