याचते स्म परिधापिकाः सखीः
सा स्वनीविनिबिडक्रियां यदा ।
अन्वमिन्वत तदा विहस्य ता
वृत्तमत्र पतिपाणिचापलम् ॥
याचते स्म परिधापिकाः सखीः
सा स्वनीविनिबिडक्रियां यदा ।
अन्वमिन्वत तदा विहस्य ता
वृत्तमत्र पतिपाणिचापलम् ॥
सा स्वनीविनिबिडक्रियां यदा ।
अन्वमिन्वत तदा विहस्य ता
वृत्तमत्र पतिपाणिचापलम् ॥
अन्वयः
AI
यदा सा स्व-नीवि-निबिड-क्रियाम् परिधापिकाः सखीः याचते स्म, तदा ताः विहस्य अत्र पति-पाणि-चापलम् वृत्तम् (इति) अन्वमिन्वत ।
Summary
AI
When she asked her attendant friends to tighten the knot of her waist-garment, they, smiling, inferred that the mischief of her husband's hand had occurred there.
पदच्छेदः
AI
| याचते | याचते (√याच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | requests |
| स्म | स्म | (makes past tense) |
| परिधापिकाः | परिधापिका (२.३) | her dressing maids |
| सखीः | सखी (२.३) | friends |
| सा | तद् (१.१) | she |
| स्वनीविनिबिडक्रियाम् | स्व–नीवि–निबिडक्रिया (२.१) | the act of tightening her own waist-knot |
| यदा | यदा | when |
| अन्वमिन्वत | अन्वमिन्वत (अनु√मा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they inferred |
| तदा | तदा | then |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | having smiled |
| ताः | तद् (१.३) | they |
| वृत्तम् | वृत्त (√वृत्+क्त, १.१) | has occurred |
| अत्र | अत्र | here |
| पतिपाणिचापलम् | पति–पाणि–चापल (१.१) | the mischief of her husband's hand |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | च | ते | स्म | प | रि | धा | पि | काः | स | खीः |
| सा | स्व | नी | वि | नि | बि | ड | क्रि | यां | य | दा |
| अ | न्व | मि | न्व | त | त | दा | वि | ह | स्य | ता |
| वृ | त्त | म | त्र | प | ति | पा | णि | चा | प | लम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.