सिष्मिये हसति न स्म तेन सा
प्रीणितापि परिहासभाषणैः ।
स्वे हि दर्शयति ते परेण
कानर्ध्यदन्तकुरुविन्दमालिके ॥
सिष्मिये हसति न स्म तेन सा
प्रीणितापि परिहासभाषणैः ।
स्वे हि दर्शयति ते परेण
कानर्ध्यदन्तकुरुविन्दमालिके ॥
प्रीणितापि परिहासभाषणैः ।
स्वे हि दर्शयति ते परेण
कानर्ध्यदन्तकुरुविन्दमालिके ॥
अन्वयः
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तेन परिहास-भाषणैः प्रीणिता अपि सा न हसति स्म, (किन्तु) सिष्मिये । हि परेण स्वे (मुखे) ते अनर्ध्य-दन्त-कुरुविन्द-मालिके का दर्शयति?
Summary
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Though pleased by his jests, she only smiled and did not laugh. For what woman shows to another those two priceless rows of her teeth, like garlands of rubies?
पदच्छेदः
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| सिष्मिये | सिष्मिये (√स्मि कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she smiled |
| हसति | हसति (√हस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | laughs |
| न | न | not |
| स्म | स्म | (makes past tense) |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| सा | तद् (१.१) | she |
| प्रीणिता | प्रीणित (√प्री+णिच्+क्त, १.१) | pleased |
| अपि | अपि | though |
| परिहासभाषणैः | परिहास–भाषण (३.३) | by jocular words |
| स्वे | स्व (२.२) | one's own |
| हि | हि | for |
| दर्शयति | दर्शयति (√दृश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shows |
| ते | तद् (२.२) | those two |
| परेण | पर (३.१) | to another |
| का | किम् (१.१) | who (which woman) |
| अनर्ध्यदन्तकुरुविन्दमालिके | अनर्ध्य–दन्त–कुरुविन्द–मालिका (२.२) | the two rows of priceless teeth like ruby garlands |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सि | ष्मि | ये | ह | स | ति | न | स्म | ते | न | सा |
| प्री | णि | ता | पि | प | रि | हा | स | भा | ष | णैः |
| स्वे | हि | द | र्श | य | ति | ते | प | रे | ण | का |
| न | र्ध्य | द | न्त | कु | रु | वि | न्द | मा | लि | के |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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